अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू हुआ तो अविभाजित सरगुजा जिले के लोग भी आंदोलन में कूद पड़े। विहिप, आरएसएस, भाजपा, अभाविप से जुड़े कार्यकर्ता भी अपने-अपने साधनों से अयोध्या के लिए कूच करने लगे। 1990 और 1992 में हुए कार सेवा में यहां से बड़ी संख्या में रवाना हुए पर अयोध्या पहुंच नहीं पाए। कई अयोध्या से 10 किमी पहले रोक दिए गए। कई लोगों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अस्थायी जेलों में बंद होना पड़ा। यहां से कार सेवा में शामिल होने निकले वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल सिंह मेजर के साथी चित्रकूट के आगे एक गांव में रोक लिए गए। इनकी बसों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी। चित्रकूट के उक्त गांव के लोगों की सेवा भावना को आज भी याद कर भाव विभोर हो जाते हैं। उक्त गांव के पुरूष अपने घर से बाहर निकल आए और कुछ देर में ही तीन हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कर दी। और तो और महिलाओं को अपने घर में रात बिताने जगह दी और खुद घर के बाहर रहे। यहां से अयोध्या के लिए रवाना हुए कई लोग आज दुनिया में भी नहीं है पर जो लोग नौजवान थे और आंदोलन में शामिल थे आज मंदिर निर्माण की खबर से ही उत्साहित हैं। इन सभी का कहना है कि हमने तो सोचा भी नहीं था यह दिन भी आएगा। पांच अगस्त को इसकी खुशियां मनाने की तैयारी में लोग परिवार सहित कर रहे हैं। घर-घर दीप जलेगा और श्रीराम की पूजार्चना होगी। घर-घर ध्वज लगाने की भी तैयारी है।

आज भी जेहन में है अफरा-तफरी का वह नजाराः मेजर

हस्तशिल्प बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मेजर अनिल सिंह बताते हैं कार सेवा में दो बार मैं अपने साथियों के साथ शामिल हुआ हूं। चित्रकूट में हम लोग गिरफ्तार हो गए थे। हमें खुले जेल में रखा गया था। हमें जहां पुलिस ने रोका उस गांव के लोगों की सह्दया आज भी मुझे याद है। तीन हजार लोगों के लिए कुछ देर में ही गांव वालों ने पूरी-सब्जी, अचार की व्यवस्था कर दी। हम सब भूखे-प्यासे थे। रात में हम वहीं ठहरे और ग्रामीणों से यह पता चला कि उक्त गांव में एक राम मंदिर की स्थापना हो चुकी है पर प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई है। दूसरे दिन ग्रामीणों के साथ हम सुबह सभी रैली की शक्ल में गए और प्राण प्रतिष्ठा कर दिया। वहां से हमें आगे नहीं बढ़ने दिया गया और मेरे साथी स्व. विनोद पांडेय, स्व. वासू मुखर्जी व वरिष्ठ भाजपा नेता बालकिशन सिंह भी साथ में थे। वहां से हम लोग भोपाल चले गए और हफ्ते भर बाद वापस लौट गए। दूसरी बार अयोध्या के लिए रवाना हुए तो 10 किमी पहले रोक दिए गए। वहां इतनी भीड़ थी कि अफरातफरी मच गई। इन सब परेशानियों के बावजूद श्रीराम के काज के लिए हम सब निकले थे इसलिए उत्साह भी जबरदस्त था।

ऐतिहासिक पल है वर्तमान पीढ़ी के लिएः अखिलेश

भाजपा जिलाध्यक्ष अखिलेश सोनी का कहना है कि वर्षों से करोड़ों लोगों के अराध्य देव श्रीरामचंद्र का मंदिर बनने जा रहा है। यह ऐतिहासिक पल है वर्तमान पीढ़ी के लिए उत्साह का पल है। अयोध्या आंदोलन के समय मैं अभाविप से जुड़ा था। तब मन में यह बात आई कि भारत देश में वह भी अयोध्या में जहां श्रीराम ने जन्म लिया था वहां मंदिर नहीं है। मंदिर के लिए आंदोलन हो रहा है। तब से आज तक मंदिर के लिए बातें होती रही। कई सवाल खड़े होते रहे। बचपन से अब तक न जाने कितनी बातें हुई होंगी पर अब कानूनी बाधाएं खत्म हुई और पांच अगस्त को मंदिर के लिए ईंट रखी जा रही है। यह सुखद पल हम सभी के लिए यादगार रहेगा। हम सभी अपनी भावनाएं घरों में दीप जलाकर प्रकट करेंगे।

असली दीवाली तो अब मनेगीः अभिमन्यु

वरिष्ठ भाजपा नेता अभिमन्यु गुप्ता कहते हैं कि असली दीवाली तो पांच अगस्त को मनेगी। घर-घर दीप जलेंगे। श्रीराम की पूजा होगी। भारत वर्ष के लिए यह ऐतिहासिक दिन है। मुझे याद है 1990-92 में यहां से हमारे साथी कार सेवा में जा रहे थे तब मैं सरगुजा भाजयुमो को कोषाध्यक्ष था। मैं किसी कारणवश जा नहीं सका। पता चला हमारे साथी यूपी बार्डर में गिरफ्तार कर लिए गए हैं। युवाओं में जोश व जज्बा था। पुलिस की कड़ाई थी पर किसी में डर नहीं था। सभी के संघर्षों और न्यायालय के निर्णय ने यह ऐतिहासिक पल दिया है।

हमने सोचा नहीं था यह पल आएगाः बाबूलाल

भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक व छत्तीसगढ़ चेंबर आफ कामर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष बाबूलाल गोयल बताते हैं कार सेवा में हम अपने वरिष्ठ साथियों के साथ रवाना हुए थे। इलाहाबाद में हम सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। वहां से फतेहपुर ले गए। वहां हमें क्रिश्चियन कालेज में बनाए गए अस्थायी जेल में डाल दिया गया। यहां हमें 12 दिन रखा गया था। दूसरे दिन पता चला विहिप के मुखिया अशोक सिंघल ने सभी कार सेवकों को वापस जाने की अपील की है क्योंकि वहां अपार भीड़ पहुंच चुकी थी। हम सभी वापस 12 दिन बाद घर लौटे। हमारे साथ जो आरएसएस के रामकुमार व एक अन्य साथी थे वे इलाहाबाद स्टेशन में पांच फीट ऊंचाई से कूद गए। यह सब श्रीराम मंदिर के लिए जोश व जज्बे का कारण था। तब जितने दिन में फतेहपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़ में रहे दैनिक जागरण अखबार ढूंढते थे। तब उस अखबार में पूरी रिपोर्ट मिल जाती थी। हमने तो सोचा ही नहीं था तब का आंदोलन कितना सुख देगा।

हर किसी के लिए सौभाग्य का दिनः ललन प्रताप

वरिष्ठ भाजपा नेता ललन प्रताप सिंह ने बताया कि राम मंदिर बन रहा है यह हर देशवासियों के लिए सौभाग्य है। मैं कार सेवा में तो नहीं जा सका पर मेरे परम मित्र स्व. रविशंकर त्रिपाठी शामिल होने रवाना हुए थे और राबर्ट्‌सगंज में पुलिस ने रोक लिया। तब हुए घटना क्रम से मैं अवगत हूं। कैसा व समय था कि हम अपने आराध्य देव के मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे थे। यह हमारी पीढ़ी का सौभाग्य है कि रामलला का मंदिर वहीं बन रहा है। पांच अगस्त को हर भारतवासी को अपने घर में दीया जलाना चाहिए।

छोटा था पर सब कुछ है जेहन में: अंबिकेश

भाजपा जिला उपाध्यक्ष अंबिकेश केशरी बताते हैं 1990-92 में कार सेवा में सरगुजा से कई वरिष्ठ लोग रवाना हुए थे। तब मैं अभाविप में जुड़ चुका था। मैं छात्र था ज्यादा कुछ आंदोलन के संबंध में समझ विकसित नहीं थी पर श्रीराम को लेकर आस्था व उत्साह देख हम लोग भी आंदोलन में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहते थे। धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय हुए तो पूरा मामला समझ में आया। हमेशा दिल में एक ही बात कचोटती थी कि भारत देश में श्रीराम मंदिर के लिए हमारे अग्रजो को आंदोलन करना पड़ा है। गोलियां खानी पड़ी है। इस बीच देश ने एक ऐसा प्रधानमंत्री दिया जिसके जज्बे को हर कोई सलाम करता है। इसी बीच न्यायालय के फैसले ने देश के हर वर्ग को वह क्षण दे दिया जब श्रीराम मंदिर का निर्माण देखने का मौका मिल रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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