अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले हुए राष्ट्रव्यापी आंदोलन में सरगुजा से कई श्रीराम भक्त शामिल हुए थे। इनमें से कई अब दुनिया में नहीं हैं। कई वयोवृद्घ वर्तमान में अपनी आंखों से श्रीराम मंदिर निर्माण की आधार शिला देखने की तमन्ना संजोए हैं। ऐसे क्षण को देखने आतुर हैं जब देश के प्रधानमंत्री मंदिर निर्माण की पहली नींव रखेंगे।

चार दिसंबर 1992 में आरएसएस की एक टोली 10 परिवार के साथ यहां से रवाना हुआ था। जिसमें नगर के केशव पालोरकर भी शामिल थे। अब उनकी आयु 90 वर्ष हो चुकी है पर आज भी अयोध्या के उस आंदोलन में चली गोलियों की आवाज गूंजती है। गोलियां चली तो इनकी टोली ही बिछड़ गई। कार सेवा में गए साथियों के साथ धर्मपत्नी भी थी। वे भी भीड़ में इधर-उधर हुई तो केशव पालोरकर परेशान हो उठे। किंतु हार नहीं मानी। बिछड़ी साथियों की टोली दूसरे दिन मिल गई तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस घटना को 30 बरस बीत गए पर आज भी आंदोलन की बातें दिलोदिमाग से बाहर नहीं हुई। चूंकि आंदोलन में केशव पालोरकर शामिल थे इसलिए उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। उनका मानना है कि आंदोलन में एक तिनके की भूमिका मेरी भी थी जिसके कारण आज स्वप्न सा लगने वाला राममंदिर बनने जा रहा है। वयोवृद्घ केशव पालोरकर बताते हैं चार दिसंबर 1992 में परिवार की टोली के साथ देवांगन भैया के साथ मेरी पत्नी पुष्पा पालोरकर व जनसंघ के वरिष्ठ नेता रेवतीरमण मिश्रा की धर्मपत्नी भी साथ थी। हम सभी बिश्रामपुर से कटनी गए। वहां से मुंबई से आने वाली ट्रेन से अयोध्या जाना था। कोई रिजर्वेशन नहीं था। कटनी में जब हम ट्रेन में बैठे तो देखा कि अधिकांश युवा कार सेवक ही थे जो मुंबई से आ रहे थे। उन्होंने तत्काल हमें अपना बर्थ दे दिया। युवाओं में गजब का जोश था। उस वक्त मेरी उम्र 60 वर्ष की थी। वे ट्रेन में ही बोलने लगे काका इस बार कार सेवा पूर्ण करना है। केशव बताते हैं अयोध्या में पूरे भारत से कार सेवक पहुंचे थे। हम लोग अयोध्या में एक धर्मशाला में रुके। छह दिसंबर को हम सभी कार सेवक सरयू नदी से बालू लाकर शिवलिंग बनाकर पूजन कर रहे थे तभी सूचना मिली कि युवक कार्यसेवकों की एक टुकड़ी ने विवादित ढांचा गिरा दिया है और सब तरफ अफरातफरी का वातावरण निर्मित हो गया है। हम चौकन्ने होते तब तक गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी। हमारी टोली के सदस्य बिछड़ गए। मेरे साथ चार लोग हनुमानगढ़ी तक किसी तरह पहुंचे। रात को वहीं रुक गए। मन में डर व भय भी था। दूसरे दिन पता चला कि कार सेवा शुरू है। हम लोग भी तगाड़ी से मलबा फेकने का काम करने लगा। मन में सेवा की खुशी थी और भारत के विभिन्न स्थानों पर दंगों की खबर से मन भी दुखी था। मन में यही विचार आता था कि विवादित ढांचा जहां पूजार्चना भी नहीं होती थी, क्या प्रेम से राम जन्मभूमि न्यास को नहीं दिया जा सकता था। किसी तरह हम स्थिति सामान्य होने पर वापस सरगुजा लौटे पर मन दंगों से दुखी हो गया था। मन में एक ही सपना था कि देश के कोने कोने से पहुंचे कार सेवकों की तमन्ना जल्द पूरी हो और मंदिर का निर्माण हो। आज वह सपना पूरा हुआ है।

सरगुजा से भी गई थी श्रीराम लिखी 1001 ईंटः करताराम

वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व पार्षद करता राम गुप्ता बताते हैं सरगुजा के कृष्ण गोपाल अग्रवाल, गोपाल चोपड़ा, सेवाराम अग्रवाल, हरबंश गुप्ता, पीआर कश्यप जैसे कई लोगों को कार सेवा के लिए मैंने विदाई दी थी। तब मैं जा न सका क्योंकि मेरे बड़े भाई सेवाराम अग्रवाल आंदोलन में जाने तैयार हो चुके थे। मैंने अपने ईंट भठ्ठे व गीता गोस्वामी के ईंट भठ्ठे से श्रीराम लिखा 1001 ईंट भिजवाया था। यह ईंट अयोध्या तक पहुंची तब राम के नाम पर कुछ भी करने के लिए लोग आते थे। यहां से जो लोग गए थे उनमें स्व. गोपाल चोपड़ा आंदोलन के दौरान मची अफरातफरी में गायब हो गए। सभी साथी चिंतित हो गए। सभी को डर था कहीं हमारे साथी शहीद तो नहीं हो गए। जब सभी वापस अंबिकापुर लौट आए तो गोपाल चोपड़ा की वापसी नहीं हुई थी। कुछ दिन बाद गोपाल चोपड़ा वापस लौटे तो सभी में उत्साह का संचार हुआ। पांच अगस्त उन सभी के लिए खुशी का दिन है जो आंदोलन में कूदे थे। उनकी अगली पीढ़ी राममंदिर निर्माण को देख उत्साहित हैं। इस दिन हम सभी दीप जलाएंगे।

जब हम सब 43 लोग हो गए थे गिरफ्तार : भारत

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भारत सिंह सिसोदिया बताते हैं कार सेवा में जाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ हम 43 लोग रवाना हो रहे थे तभी गांधी चौक पर हमें गिरफ्तार कर लिया गया और जेल में दाखिल कर दिया गया। मैं तब छात्र था। मन में उत्साह था क्योंकि हमारे अग्रज स्व. रविशंकर त्रिपाठी, गोपाल चोपड़ा, विमलेंद्र मुखर्जी जैसे कई ऐसे लोग हमारे साथ थे। हमें जाने का मौका तो नहीं मिला पर जेल के महिला बैरक में हमें चार दिन बिताना पड़ा। चार दिन जेल में रहने के बाद भी उत्साह में कोई कमी नहीं थी। मैं और मेरे साथी बैरक का ताला तोड़ दिए थे। इस पर उन्हें स्व. रविशंकर त्रिपाठी से डांट भी मिली थी पर उत्साह ऐसा था कि मन में श्रीराम का नारा गूंज रहा था। यह आंदोलन मेरे जीवन का हिस्सा बन गया था। भाजपा में शामिल होने का कारण भी श्रीराम का वह नारा था जिसने आकर्षित किया। मुझे गर्व है कि मैं लालकृष्ण आडवाणी की उस रथयात्रा को नजदीक से देखा था। अब मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। यह हर भारतवासी के लिए गर्व का विषय है। इसके लिए हमने एक अभियान चलाया है। कांग्रेस नेताओं को हम इससे जुड़कर अपने-अपने घरों में पांच-पांच दीए जलाने का आह्वान कर रहे हैं।

रथयात्रा के स्वागत का मिला था मौकाः ओमप्रकाश

अविभाजित सरगुजा जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल का कहना है कि अयोध्या के आंदोलन में मैं शामिल तो नहीं था पर हमसे जुड़े लोग शामिल थे तो एक-एक चीज की जानकारी मिलती थी। आंदोलन को लेकर खूब बातें होती थी। भाजपा की बैठकों, रैलियों में श्रीराम मंदिर को लेकर नारे गूंजते थे। इस बीच लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा निकली तो सरगुजा पहुंची और बलरामपुर के रास्ते झारखंड रवाना हुई। बलरामपुर छोटा सा कस्बा था जहां चंद लोग रहते थे। तब कुछ भाजपा के नेताओं के साथ आडवाणी जी की रथयात्रा के स्वागत करने का मौका मिला था। आज न्यायालय के फैसले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच से करोड़ों की आस्था का केंद्र श्रीराम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है।

कार सेवा में जाने पिता से हो गया था विवादः लेखराज

भाजपा जिला उपाध्यक्ष लेखराज अग्रवाल बताते हैं कार सेवा में जाने तब युवाओं में तो जोश और उत्साह था ही बड़े-बुजुर्ग आगे रहते थे। बड़ी इच्छा थी मैं कार सेवा में शामिल होता पर मेरे पिता कृष्णगोपाल अग्रवाल व माता कैलाश अग्रवाल जाने के लिए तैयार हो गए। एक जीप किराए में लेकर एक-दो अन्य परिवारों के साथ माता-पिता अयोध्या के लिए रवाना हुए और काफी संघर्षों के बाद अयोध्या पहुंचे। भीड़ इतनी थी कि पैदल चलना पड़ गया। वहां जब स्थिति बिगड़ी तो माता और पिता दोनों परेशान हो गए। पूरे 14 दिन बाद किसी तरह वापस लौटे। मुझे याद है मैंने पिताजी को कहा कि मैं कार सेवा में जाऊंगा तो उन्होंने मुझे डांट दिया और खुद तैयार हो गए। इस बात को लेकर मेरा पिता से विवाद भी हो गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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