अंबिकापुर Ambikapur News:। हाथी राहत और पुनर्वास केंद्र में पशु अथवा वन्य जीव चिकित्सक की कमी अब खल रही है।हाथी के दो बच्चों की मौत के बाद वन विभाग बाहर के चिकित्सकों की सेवाएं लेकर हर्पीस वायरस के संक्रमण का प्रयास रोकने में लगा हुआ है।विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप कर्मचारी केंद्र के पांच किलोमीटर के दायरे में लगातार भ्रमण कर रहे है।जहां भी हाथियों का लीद नजर आ रहा है उसे एकत्रित कर जलाया जा रहा है।

सैनिटाइजर का छिड़काव कर वायरस संक्रमण की संभावना को नष्ट करने का काम किया जा रहा है इसकी मुख्य वजह है कि तमोर पिंगला अभयारण्य का यह वन क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक रहवास है।साल भर हाथी यहां निवास करते है।जंगली हाथियों के लिए यहां चारा-पानी का बेहतर उपाय किया गया है।हाथी राहत और पुनर्वास केंद्र में हर्पीस वायरस की संभावना के मद्देनजर यह कोशिश की जा रही है क्योंकि केंद्र के हाथी जंगल में भी चरने जाते थे।यदि जंगली हाथियों पर संक्रमण हुआ तो स्थिति बिगड़ सकती है।जंगली हाथियों के दल में भी छोटे बच्चे है।यह वायरस हाथियों के बच्चों पर ज्यादा असर करता है।

एलीफैंट प्रोजेक्ट सरगुजा के फील्ड डायरेक्टर के मेचियो के साथ टीम लगातार हाथी पुनर्वास केंद्र में सक्रिय है।यहां कई माह से पशु चिकित्सक भी नहीं है इसलिए नियमित रूप से हाथियों की स्वास्थ्य जांच भी नहीं हो पा रही है लेकिन दो बच्चों की मौत के बाद केंद्र के कर्मचारियों को ही जबाबदारी दी गई है कि वे नियमित रूप से हाथियों के शरीर की तापमान की जांच करेंगे।ऊपरी तौर पर यह देखेंगे कि किसी हाथी के शरीर के किसी भाग में सूजन या अलग से कोई निशान तो नहीं उभर रहा है।फिलहाल केंद्र के बड़े हाथियों में किसी प्रकार का कोई लक्षण देखने को नहीं मिला है।

कर्नाटक से लाये गए पांच प्रशिक्षित कुमकी हाथियों ने अभी तक अपनी उपयोगिता साबित नहीं की है।जंगली हाथियों को काबू में करने की मंशा से इन हाथियों को छत्तीसगढ़ लाया गया था।कोरबा जिले के एक आपरेशन में एक कुमकी हाथी को लगाया गया था लेकिन जंगली हाथी से लड़ाई में वह जख्मी हो गया था।कर्नाटक के पांच हाथियों के अलावा केंद्र में सोनू और सिविल बहादुर नामक दो हाथी को भी रखा गया है।सिविल बहादुर की आयु भी अत्यधिक हो चुकी है।पूर्व में वह भी बीमार हो चुका है।ऐसे में वन विभाग की पूरी कोशिश बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने की है।इसी केंद्र के नजदीक जंगली हाथियों की मौजूदगी ने चिंता खड़ी की है।उनकी सुरक्षा भी विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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