अंबिकापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड के माझी, मझवार बाहुल्य गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना अघोषित ठेकेदारी प्रथा और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ती जा रही है। हितग्राहियों के खाते से दलाल राशि ट्रांसफर करा आधा-अधूरा घटिया निर्माण कर अवैध कमाई में लगे हुए हैं। जिम्मेदार अधिकारी कागजी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को गुमराह करने में लगे हुए हैं।

अधूरे निर्माण की यह तस्वीर मैनपाट विकासखंड के माझी बाहुल्य कुनिया गांव की है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहां बंटू माझी तथा उसके पिता बूढ़ा माझी का आवास स्वीकृत हुआ था। इसकी जानकारी लगते ही ठेकेदार और दलाल उसके पीछे पड़ गए। पिता-पुत्र को झांसा दिया गया कि वे निर्माण कार्य समय सीमा में पूर्ण नहीं करा पाएंगे। समय सीमा में मकान नहीं बन पाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। इस झांसे में आकर पिता-पुत्र द्वारा जब समस्या का समाधान पूछा गया तो दलाल और ठेकेदार ने आश्वस्त किया कि वे मकान बना कर दे सकते हैं। बकायदा स्वीकृत राशि बैंक से आहरित करा घटिया निर्माण कराना शुरू कर दिया। फ्लाई एस ईंट तथा मानक के अनुरूप सीमेंट का उपयोग न कर घटिया निर्माण का नतीजा यह हुआ कि दीवार अपने आप टूटने लगे। हल्का धक्का देने से ही एक-एक ईंट बाहर निकल आ रही है। आधा अधूरा निर्माण कराया गया है। अब हितग्राहियों को धमकाया जा रहा है कि जितना निर्माण कराया गया है, उतने की ही राशि स्वीकृत हुई थी। जब शेष राशि आएगी तो निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाएगा। मैनपाट में यह स्थिति सिर्फ ग्राम पंचायत कुनिया में ही नहीं बल्कि उन दूसरे पंचायतों में भी है, जहां माझी मझवार लोग ज्यादा निवास करते हैं। शिक्षा के मामले में पिछड़े ऐसे ही लोगों को ठेकेदार और दलाल अपने चंगुल में लेकर पीएम आवास बना देने का झांसा देकर अवैध कमाई करने में लगे हुए हैं। यदि मैनपाट विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत कायोर् की जांच हो तो बड़ा भ्रष्टाचार और घोटाला उजागर हो सकता है।

1046 आवास है स्वीकृत-

चालू वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायत कुनिया में 45 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से अधिकांश की हालत यही है जो लोग स्वयं सारी व्यवस्था कर निर्माण करा रहे हैं, उनका आवास निर्माण तो गुणवत्तायुक्त नजर आ रहा है, लेकिन जहां दलालों और ठेकेदारों ने अघोषित ठेकेदारी प्रथा से निर्माण शुरू कराया है, वह सारे निर्माण स्तर हीन है। दीवारें गिर रही है और मजबूती के नाम पर लगाए गए पतले छड़ ही नजर आ रहे हैं। समूचे मैनपाट विकासखंड में चालू वित्तीय वर्ष में 1046 प्रधानमंत्री आवास बनाए जा रहे हैं।

निर्माण सामग्री की उपलब्धता में दिक्कत-

पहाड़ी पर मैनपाट के अधिकांश गांव बसे हुए हैं। ऊपरी क्षेत्र में एक भी ईंट भट्ठा संचालित नहीं है। निर्माण सामग्रियां भी आसानी से नहीं मिल पाती। मैदानी क्षेत्र के लिए पीएम आवास हेतु राशि का जो प्रावधान किया गया है वहीं राशि भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों के लिए भी प्रस्तावित है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत होने के बावजूद अधिकांश गरीब परिवार के लोग खुद से मकान बनाने के बजाय दलालों और ठेकेदारों को यह काम सौंपने से भी पीछे नहीं हटते और ठगी के शिकार हो रहे हैं। न तो उनका मकान बन रहा है और न ही राशि की उपयोगिता ही नजर आ रही है।

कागजी आंकड़े पर विश्वास कर रहे अफसर-

मैनपाट विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में भर्राशाही चरम पर है, लेकिन कागजी आंकड़े सब कुछ बेहतर बताते हैं। मैनपाट के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा उच्चाधिकारियों को जो कागजी जानकारी प्रेषित की जाती है, उसे ही सही मान लिया जाता है, जबकि कुनिया के सामान कई ऐसे गांव है, जहां आधा-अधूरा, घटिया निर्माण योजना में बरती जा रही लापरवाही को बयां कर रहा है। मैनपाट विकासखंड के प्रधानमंत्री आवास योजना के ब्लाक समन्वयक संतलाल कुमार ने बताया कि बंटू माझी व उसके पिता बूढा माझी के नाम से स्वीकृत पीएम आवास का घटिया निर्माण कराने की शिकायत मिली है। दिक्कत यह है कि भोले-भाले माझी दूसरे के झांसे में आकर राशि ट्रांसफर कर देते हैं, ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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