अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मेडिकल कालेज अंबिकापुर को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ स्पीच एंड हियरिंग (राष्ट्रीय वाक एवं श्रवण संस्थान (एआइआइएसएच) मैसूर कर्नाटक ने अंबिकापुर में मेडिकल कालेज में संस्थान की यूनिट आउटरीच सर्विस सेंटर खोलने की अनुमति दे दी है। नाक कान, गला रोग विभाग के माध्यम से इस यूनिट का संचालन किया जाएगा। इस संस्थान को नाक कान, गला, रोग के लिए सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है, इसे ईएनटी के एम्स के रूप में भी जाना जाता है।

मेडिकल कालेज अंबिकापुर के दिन डा. रमनेश मूर्ति ने बताया कि इस यूनिट की स्थापना से नाक एवं श्रवण बाधित मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार दिया जा सकेगा। ईएनटी विभाग एवं मेडिकल कालेज अंबिकापुर के अधिष्ठाता की सक्रियता से मेडिकल कालेज प्रबंधन को यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। इस यूनिट की स्थापना के लिए छत्तीसगढ़ के समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों के मध्य प्रतिस्पर्धा की स्थिति थी लेकिन मेडिकल कालेज अंबिकापुर के ईएनटी विभाग में उपलब्ध सुविधाओं, संसाधनों के मद्देनजर यहां का दावा ज्यादा मजबूत रहा और संस्थान ने अंबिकापुर मेडिकल कालेज में यूनिट स्थापना की मंजूरी दे दी। डीन डा. रमनेश मूर्ति ने बताया कि मेडिकल कालेज परिसर में मेडिकल एडमिन ब्लाक के समीप स्थित नवनिर्मित भवन में यह यूनिट प्रारंभ की जाएगी। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि तीन मार्च 2022 को विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर इस यूनिट का शुभारंभ कर दिया जाए, हालांकि शुभारंभ की तिथि राष्ट्रीय संस्थान द्वारा निर्धारित की जाएगी लेकिन उसके पहले मेडिकल कालेज प्रबंधन सारी तैयारियों को पूरा रखेगा। डीन डा. रमनेश मूर्ति एवं आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ स्पीच एवं हियरिंग की डायरेक्टर पुष्पावती द्वारा इस सुविधा के लिए एमओयू पर शीघ्र हस्ताक्षर किए जाएंगे। सिकलसेल यूनिट की तरह मेडिकल कालेज अस्पताल में यह यूनिट भी कार्य करेगी।इससे सरगुजा अंचल के मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।

यह होगा फायदा-

आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ स्पीच एंड हियरिंग की इकाई अंबिकापुर मेडिकल कालेज में आरंभ हो जाने से अंचल के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय संस्थान की इकाई होने से यहां अत्याधुनिक चिकित्सा संसाधनों का विस्तार होगा। ऐसे मरीज जो सुनने और बोलने में असमर्थ होते है, ऐसे मरीजों का स्थानीय स्तर पर उपचार हो सकेगा।

वर्जन-

राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा संस्थान की इकाई आरंभ होना बड़ी उपलब्धि है। इस संस्थान को नाक, कान, गला रोग विभाग के एम्स के रूप में जाना जाता है। इस यूनिट की स्थापना के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों में कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। मौका मेडिकल कालेज अंबिकापुर को मिला है।

डा. रमनेश मूर्ति

डीन,मेडिकल कालेज अंबिकापुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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