सूरजपुर (नईदुनिया न्यूज)। पीपीआर विषाणु जनित भेड़-बकरियों में होने वाला एक विषाणु (वायरस) संक्रामक रोग है। यह रोग इतना खतरनाक है कि एक सप्ताह के अंदर पशुओं की मृत्यु हो जाती है। इस रोग में तेज बुखार के साथ-साथ सर्दी, खासी के साथ-साथ निमोनिया, आंख एवं नाक से पानी का स्त्राव जो बाद नाक में जम जाता है जिससे पशुओं को सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके कारण मेमनो में मृत्यु दर अधिक पाई जाती है। इसकी रोकथाम के लिए बाहर से लाए गए पशुओं को अलग रखना, बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरन्त समीप के पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचित कर उपचार प्रारंभ करना चाहिए। पशुओं में पीपीआर से बचाव हेतु उत्तम उपाय प्रतिबंधात्मक टीकाकरण है। जिले में भेड़-बकरी के प्रजाति के सभी पशुओं के पीपीआर टीकाकरण हेतु प्रतिबंधात्मक टीकाकरण 20 मई से 20 जूनतक किया जा रहा है।

पशुओं को दिया जा रहा एचएस एवं बीक्यू टीका-

बरसात के मौसम में पशुओं में गलघोंटू एवं एकटंगिया का खतरा बड़ जाता है। वर्षा ऋतु से पूर्व गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं में गलघोंटू एवं एकटंगिया बीमारी से बचाव हेतु जिले में सघन टीकाकरण अभयिान चलाया जा रहा है। गलघोंटू एवं एकटंगिया दोनों जीवाणु जनित रोग है। गलघोंटू बीमारी में पशुओं को तेज बुधार, आंखों में सूजन के साथ-साथ गले में संक्रमण होता है। इससे पशु को सांस लेने में तकलीफ होती है। एकटंगिया बीमारी में भी तेज बुखार होता है। एकटंगिया रोग के लिए चार माह से दो वर्ष के पशु अति संवेदनशील होते है, जबकि गलघोंटू चार माह के ऊपर के सभी पशुओं में होने की संभावना रहता है। जिले में गलघोंटू एवं एकटंगिया टीकाकरण अभयिान चल रहा है जिसमें सभी गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं में एचएस व बीक्यू का टीका मुफ्त में पशुधन विकास विभाग द्वारा लगाया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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