अंबिकापुर। विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान जोर पकड़ चुका है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क इस वक्त आसान नहीं है। धान कटाई का सीजन है। ग्रामीण सुबह से ही खेतों में चले जा रहे हैं। ऐसे में वोट की अपील लेकर पहुंच रहे नेताओं को गांव में कुछ गिनेचुने लोग ही मिल रहे हैं। मजबूरन प्रत्याशी व उनके समर्थकों को भी खेतों में उतरना पड़ रहा है। यही नहीं विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी, कार्यकर्ता व पदाधिकारी वोटरों को रिझाने धान कटाई में हाथ भी बटा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में यह नजारा अब हर रोज देखने को मिल रहा है।

पक चुकी हैं बालियां, अब घर बैठने का वक्त नहीं

सरगुजा जिले में नवंबर धान कटाई का प्रमुख महीना होता है। जिले में किसानों ने धान की खेती बड़े पैमाने पर की है। धान की बालियां पक चुकी हैं ऐसे में उनके पास अब घर में बैठने का समय नहीं है। घर से सुबह ही किसान परिवार सहित खेतों में धान कटाई करने निकल जा रहा है। वहीं खलिहान में धान की मिंजाई कराने में व्यस्त हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जनसंपर्क के लिए निकल रहे विभिन्न् राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों व उनके समर्थकों को किसान मतदाताओं से मिलने खेतों तक पहुंचने की मजबूरी बन आई है।

सुबह जल्दी पहुंच गए तो ही मिलेंगे घर पर

जो प्रत्याशी सुबह आठ बजे से पहले लोगों के घरों में पहुंच जा रहे हैं, उनसे तो लोगों की मुलाकात घरों में ही हो जा रही है। लेकिन देर से ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने वालों को गांव सूने मिल रहे हैं। उन्हें या तो वैसे ही लौटना पड़ रहा है या फिर खेतों में जाना पड़ रहा है।

ठंड बढ़ी और आग सेंकते चल रही चर्चा

ग्रामीण इलाकों के दिनचर्या को जो प्रत्याशी व राजनीतिक दल के कार्यकर्ता, पदाधिकारी अच्छी तरह समझते हैं वे सुबह पांच बजे ही ग्रामीण क्षेत्रों में निकल पड़ते हैंं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह-शाम ठंड पड़ने लगी है। ऐसे में खलिहान में धान की मिंजाई करने वाले लोग आग जलाकर हाथ-पैर सेंकने समूह बनाकर बैठे रहते हैं। ऐसे स्थानों की तलाश प्रत्याशी व उनके समर्थक कर रहे हैं। मौके पर जाकर आग तापते हुए चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं।

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