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अनंगपाल दीक्षित

अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की सीमा पर जब भी तनाव की स्थिति निर्मित होती है फौजियों का सीना फूलने लगता है और रक्त संचार भी तेज हो जाता है। समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में जब भी ऐसी खबरें आती हैं फौजी उठ खड़े होते हैं। उनका परिवार भी ऐसे समय में सीमाओं की चर्चाएं को लेकर गंभीर हो उठता है। बार्डर की हलचलें देख व सुनकर फौजी रोमांचित भी हो उठे हैं। इन दिनों चीन की सीमा पर जो हलचलें चल रही हैं उसको लेकर भी फौज में सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त फौजियों के मन मस्तिष्क पर बार्डर पर ऐसे हालातों की यादें ताजा हो उठती हैं। 18 वर्ष की उम्र में नौसेना में भर्ती हुए नगर के गोधनपुर निवासी ऋषिकेश उपाध्याय भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्घपोत किलर क्लास में नेतृत्व कर चुके हैं। गुजरात की समुद्री सीमा जो करांची से मिलती है यहां कई बार तनाव की स्थिति का सामना कर चुके हैं। बार्डर पर जब भी ऐसी तनातनी की स्थिति निर्मित होती है तब एक फौजी के मन में क्या चलता है, आइए जानें नौसेना के सेवानिृवत्त फौजी ऋषिकेश उपाध्याय की जुबानी..

नौसेना में सिपाही के रूप में भर्ती हुए ऋषिकेश बताते हैं मुझे गर्व है कि मैं भारतीय नौसेना में उस अग्रिम पंक्ति के युद्घपोत में 15 साल सेवाएं दे चुका हूं जो पाकिस्तान के समुद्री बार्डर पर चौकसी में तैनात रहती है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के इस बार्डर पर इस युद्घपोत में 150 जवान तैनात रहते हैं जहां कई बार पाकिस्तान जहाजों से आमना-सामना होता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है किंतु भारतीय फौजियों से चाहे वह पाकिस्तान हो, चाहे चीन के सैनिक घबराते हैं। भारतीय फौजी चाहे किसी भी बार्डर पर हो आत्मविश्वास से लबरेज होता है। अब तो भारतीय फौज में पहले से कई गुना क्षमता में वृद्घि हो चुकी है। हम चीन का जवाब देने में सक्षम हो चुके हैं। भारत का मेनपावर फौजी काफी मजबूत है। हर सीमा पर पड़ोसी चीन और पाकिस्तान दबाव देने की कोशिश करते हैं पर भारतीय फौजियों के आत्मविश्वास और साहस को देख कदम पीछे ले जाते हैं। बार्डर पर जब भी हलचलें बढ़ती हैं किसी भी सीमा पर तैनात फौजी रोमांचित हो उठता है। वह डरता नहीं है। चीन के बार्डर पर यदि माहौल गर्म है तो भारतीय फौजी भी अपना कमर कस कर तैयार हैं। भारत के फौजियों के साथ देश के नागरिकों की भी भावनाएं फौजियों के साथ होती हैं। इसलिए उसका आत्मविश्वास हमेशा बढ़ा रहता है। यही आत्मविश्वास पड़ोसी देशों के सैनिकों के साहस को तोड़ता है।

जब पाकिस्तानी जहाज ने हवा में लगाए थे कई चक्कर

ऋषिकेश बताते हैं एक बार की घटना से मैं बेहद रोमांचित होता हूं जब हम गुजरात के बार्डर पर ड्यूटी कर रहे थे तब अचानक पाकिस्तानी जहाज हवा में राउंड मारने लगा तो हम लोगों को फौरन सतर्क होना पड़ा। बार्डर पर ऐसी घटनाएं जल, थल और वायु में अक्सर देखने को मिलती है। इसके लिए हर फौजी तैयार रहता है। पड़ोसी देशों की ऐसी हरकतों को कोई भी फौजी हल्के में नहीं लेता और सजग हो जाता है। बार्डर पर ऐसी घटनाएं रोमांचित करने वाली होती हैं।

कारगिल युद्घ के समय में बड़ी थी इस बार्डर में सजगता

नौसेना में कार्य कर चुके ऋषिकेश ने बताया कि जब कारगिल में आपरेशन विजय चल रहा था जब मेरी ड्यूटी पाकिस्तान बार्डर में लगी थी। तब ऐसा तनाव था हम सभी साथियों के मन में एक ही बात आती थी कि कभी भी इस बार्डर में झड़प हो सकती है। जब तक कारगिल युद्घ चला तब तक हम भी अपने बार्डर पर तैयार बैठे थे। कश्मीर की हलचल गुजरात से लगे पाकिस्तान बार्डर में भी महसूस की जा रही थी। तब ऐसा लग रहा था इस बार्डर में भी युद्घ की स्थिति निर्मित हो जाएगी। कई बार ऐसा लगा कि यह बार्डर भी खुल जाएगा और हमें भी आगे बढ़ना पड़ेगा। तब हम लोग काफी सजगता के साथ समय बिताए।

अब हैं शिक्षक, प्रेरणा से स्कूल के बच्चे बने फौजी

नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वापस अंबिकापुर शहर पहुंचे ऋषिकेश उपाध्याय 2005 में शिक्षक बन गए और यहां से 17 किमी दूर सिधमा स्कूल में शिक्षा देने के साथ देशभक्ति की भावना बच्चों में जागृत कर रहे हैं। अपने नौसेना की सेवाओं की बातें बच्चों को बताते हैं। इस स्कूल के तीन बच्चे इनकी प्रेरणा व देशभक्ति की बातों से प्रभावित हो फौजी बन चुके हैं। अधिकांश बच्चे फौज में जाने की चाहत भी रखते हैं।

हम चीन को जवाब देने में सक्षम-ऋषिकेश

ऋषिकेश उपाध्याय का कहना है कि भारतीय फौजी डरते ही नहीं। भारत के फौजी चीन को जवाब देने में सक्षम हैं। भारत में सक्रिय सैनिकों की संख्या यदि लाखों में है तो सेवानिवृत्त फौजियों की संख्या भी कम नहीं। मुझ जैसे सेवानिवृत्त फौजी देश में 25 लाख रिजर्व रहते हैं जो सेवानिवृत्ति के बाद अलग-अलग क्षेत्र में काम करते हैं पर कभी युद्घ की स्थिति बनी तो हमेशा तैयार रहते हैं। कभी भी हमें बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि साल में छह माह मैं सेवा के दौरान पाकिस्तान के करांची बार्डर में सेवा दे चुका हूं जहां हमेशा स्थिति तनावपूर्ण रहती थी पर कभी मुझे तनाव में आने की नौबत नहीं आई। सभी साथी एक-दूसरे को साहस के साथ आत्मविश्वास का जज्बा पैदा करते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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