अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरगुजा, कोरबा और सूरजपुर जिले के सीमावर्ती जंगलों में वन विभाग अब ट्रैप कैमरे लगाएगा। क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की सामने आ रही जानकारी इन ट्रैप कैमरों से स्पष्ट हो सकेगी। कम से कम चार से छह ट्रैप कैमरे लगाने की योजना वन विभाग ने तैयार की है। बाघ के अलावा दूसरे वन्य प्राणियों की उपस्थिति को लेकर पुख्ता जानकारी एकत्रित करने वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। मुख्य वनसंरक्षक सरगुजा वनवृत्त अनुराग श्रीवास्तव के निर्देशन में वृत्त स्तरीय मांसाहारी एवं शाकाहारी वन्य प्राणियों के उपस्थिति की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष साक्ष्‌य की पहचान एवं ट्रेप कैमरा के संचालन की विधि का एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन वनश्री सभागार में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फण्ड( डब्लूडब्लूएफ) इंडिया के सीनियर प्रोजेक्ट आफिसर उपेन्द्र कुमार दुबे के द्वारा मांसाहारी एवं शाकाहारी वन्यप्राणियों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष साक्ष्‌य की पहचान एवं ट्रेप कैमरा संचालन विधि का तकनीकि प्रशिक्षण विस्तारपूर्वक प्रदान किया गया।प्रशिक्षण सह कार्यशाला को वनमण्डलाधिकारी सरगुजा वनमण्डल पंकज कमल ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मांसाहारी और शाकाहारी वन्य प्राणियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए यह कार्यशाला उपयोगी साबित होगी। आने वाले दिनों में वन विभाग की प्रस्तावित योजनाओं को लेकर भी उन्होंने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण सह कार्यशाला में उप वनमंडलाधिकारी बिजेन्द्र सिंह ठाकुर, शैलेन्द्र अमबस्ट, वमपरिक्षेत्राधिकारी गजेन्द्र दोहरे, प्रभात दुबे एवं सरगुजा , बलरामपुर , सूरजपुर , जशपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ, एलीफेंट रिजर्व सरगुजा एवं गुरुघासीदास नेशनल पार्क के मैदानी कर्मचारी उपस्थित रहें।

यह होगा फायदा

वनक्षेत्रों में विभिन्ना वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचनायें प्राप्त होती रहती है, पालतू मवेशियों का भी वनक्षेत्रों में मांसाहारी वन्यप्राणियों द्वारा शिकार किया जाता है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से वनक्षेत्रों में उपस्थित और शिकार करने वाले वन्यप्राणियों की विभिन्ना पद्धतियों से पहचान करना आसान होगा। विभिन्ना वनक्षेत्रों में वन्य प्राणियों की उपस्थिति की पहचान व निगरानी तथा उसके स्कैट, वृक्षों में किया हुआ नाखूनों का स्क्रेच, विभिन्ना प्रकार के अलग अलग पदचिन्ह से पहचान करना मैदानी कर्मचारियों के लिये आसान होगा। वन्यप्राणियों की उपस्थिति का साक्ष्‌य व वन्यजीवों के प्रजातियों की सही पहचान हो सके इसी को ध्यान में रखते हुये यह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।आने वाले दिनों में कही मांसाहारी वन्यजीवों द्वारा पालतू मवेशियों का शिकार होता है तो ट्रेप कैमरे लगाकर वन्यजीवों की निगरानी एवं पहचान करना सरल और आसान होगा।

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