बालोद। नईदुनिया न्यूज

धान खरीदी के अंतिम दौर में सोसायटियों में अचानक से बढ़ी आवक को देखते हुए जिला प्रशासन इसकी गोपनीय जांच करवा रही है। कलेक्टर किरण कौशल ने इसके तहत प्रत्येक सोसायटियों में पटवारी आरआइ और ग्राम सेवकों की ड्यूटी लगाई है। वहीं किसानों का सत्यापन करके बारदाना दे रहे हैं। जिला प्रशासन की इस व्यवस्था के बाद सोसायटी प्रबंधक सहित कोचियों में भी हड़कंप की स्थिति मची हुई है। सरकारी सोसायटियों में कोचियों का हस्तक्षेप रोकने के लिए यह व्यवस्था अपनाई गई है। जो जिले में कारगर भी साबित हो रही है। शिकायत आ रही थी कि कुछ कोचिया किसानों से मिलीभगत करके सोसायटियों में अपना धान खापा रहे हैं। निर्धारित मात्रा में सोसायटी में किसानों को धान बेचने की अनुमति रहती है, लेकिन कोचिया किसानों से सांठ-गांठ करके अपना धान किसानों के जरिये बिकवा देते हैं। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर किरण कौशल ने जांच टीम गठित की है। जो सोसायटियों में काम कर रहे प्रबंधक और चुनाव द्वारा जीतकर आए हुए अध्यक्षों की काम की भी गोपनीयता से सर्वे करवा रही है। कलेक्टर के इस फरमान के बाद गड़बड़ी करने वाले सोसायटी प्रबंधकों में हड़कंप मचा हुआ है। उन्हें डर है कि कहीं उनकी पोल ना खुल जाए। अक्सर जिन सोसायटियों में सबसे ज्यादा धान की खरीदी होती आ रही है। उन्हीं सोसायटियों में गड़बड़ी की आशंका भी ज्यादा बनी हुई है। जिसके मद्देनजर जिला प्रशासन की खुफिया निगाह सोसायटी में बनी है। कांग्रेस सरकार के आने के बाद उनकी घोषणा पूरा होते ही किसानों में खुशी है। तो वहीं अचानक से सोसायटियों में धान की आवक बढ़ गई है। क्योंकि किसानों को अब 25 सौ प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। मार्च-अप्रैल में किसानों के खाते में अंतर की राशि ट्रांसफर करने की बात स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले दिनों गुण्डरदेही में आयोजित सतनामी समाज के कार्यक्रम के दौरान कहा था कि किसान पूरी तरह से आश्वस्त हो गया है कि 25 सौ क्विंटल के हिसाब से उनका धान खरीदा जाएगा। इसलिए भी वह सोसायटियों में ज्यादा से ज्यादा धान बेचने के लिए जुगत लगा रहे हैं। ऐसी स्थिति में सोसायटी प्रबंधक और कोचिया किसानों के जरिये अपना फायदा भी निकालने में पीछे नहीं है। कुछ सोसायटियों से कलेक्टर को गोपनीय शिकायत भी मिल चुकी है कि यहां कोचियों की मिलीभगत रहती है। कोचिया के आदर सम्मान में सोसायटी प्रबंधक और अध्यक्ष कोई कमी नहीं छोड़ते हैं। इन्हीं शिकायतों के कारण कलेक्टर किरण कौशल ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जिम्मेदारी उठाई है। जिसके तहत ही सोसायटियों में अब धान बेचने आ रहे। एक-एक किसानों की विस्तृत जांच होगी। उनका रकबा कितना है और क्या-क्या उन्होंने खेत में बोया था। इसकी जांच होने के बाद पूरी सत्यापन होने के बाद उन्हें धान बेचने की अनुमति दी जाएगी। जब किसान जांच में खरे उतरेंगे। तभी उन्हें सोसायटी द्वारा बरदाना दिया जाएगा। अन्यथा किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर उनका धान नहीं खरीदा जाएगा और ना ही उन्हें कोई टोकन जारी किया जाएगा।

कोचियों में मच गई खलबली

कलेक्टर किरण कौशल के इस फरमान के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय कोचियों में खलबली मची हुई है। वह तिलमिला रहे हैं कि अपना धान अब कैसे सोसायटी में खपा पाएंगे। कई कोचिया छोटे-छोटे किसानों से मिलीभगत कर धान बेचा करते थे। वे अब किसानों को जाकर भड़का रहे हैं कि प्रशासन की बातों में ना आएं और हमारा धान अपनी रकबे में शामिल करके बेच दे। इधर जिला प्रशासन ने भी किसानों को आगाह किया है कि वे किसी भी कोचिया की बातों या बहकावे में ना आए और नियम से ही अपना धान दें। तभी उन्हें शासन की बोनस समर्थन मूल्य व अन्य योजनाओं का भी लाभ मिलता रहेगा। अन्यथा उनका पंजीयन भी निरस्त किया जा सकता है। गौरतलब है कि जब धान बेचने की शुरुआत होती है। तो पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस समय राजस्व कृषि विभाग और सहकारिता विभाग के अफसर मिलकर किसानों का पंजीयन करते हैं। उनसे रिपोर्ट ली जाती है कि वह कितने एकड़ में धान लगा रहे हैं और उस हिसाब से उनकी उपज कितनी हो सकती है। प्रति एकड़ 14.80 क्विंटल धान बेचने की अनुमति सोसायटी में रहती है।