डौंडी। नईदुनिया न्यूज

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा डौंडी में एक किसान की जमा पूंजी से हेराफेरी किए जाने मामला की जांच अभी शुरू भी नहीं हुआ है कि पार्ट टू में फिर हेराफेरी का मामला सामने आ रहा है। इस बार बैंक के कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि एक खातेदार की जमा राशि को दूसरे खातेदार ने एटीएम से राशि आहरण कर लिया। जबकि दोनों ही किसानों के पास अलग-अलग एटीएम कार्ड है। यही नहीं इस बैंक द्वारा पीड़ित किसान का एटीएम ही लॉक करा दोबारा शुरू न करने की सलाह भी दे डाली। मतलब साफ है बैंक वाले ही एटीएम को सुरक्षित नहीं मान रहा और अपनी गलती छिपाने किसानों को आपसी सहमति कराकर फिर मामला को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है कि 'बिन सहकार नहीं उद्घार ' का नारा बुलंद कर सेवा सहकारी व जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा किसानों को बैंक से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इसी बैंक द्वारा बड़े-बड़े दावा यह कहकर किया जाता है कि सहकारी बैंक किसानों के लिए है। जहां किसानों को आर्थिक रूप से मदद की जाएगी व शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। किंतु जिस तरह डौंडी शाखा के जिला सहकारी बैंक में एक के बाद एक लापरवाही और उदासीनता बरती जा रही है। उससे यहां किसानों को जोड़ने का नहीं अपितु तोड़ने का कार्य प्रतीत हो रहा है। चूंकि पीड़ित किसानों के अलावा इस बैंक के अन्य खाताधारकों का भी विश्वास अब उठने लगा है और किसान अपनी गाढ़ी कमाई को बैंक में जमा करने से खुलकर कतराने लगे हैं। चूंकि यहां एक किसान की जमा राशि को बैंक के ही किसी कर्मचारी द्वारा निकालने की घटना हो चुकी है। और अब एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है कि किसी किसान के खाता कि रकम कोई दूसरा किसान का एटीएम से निकाल रहा है। जबकि दोनों ही किसानों के पास अलग-अलग खाता क्रमांक व एटीएम कार्ड है। तो भला एक व्यक्ति की बैंक में जमा रकम दूसरे व्यक्ति का एटीएम कौन सी जादुई छड़ी से निकाल सकता है। यह संभव ही नहीं है। वैसे भी एटीएम को हर नागरिक की सुरक्षा व सहूलियत की दृष्टि से पारदर्शी रूप से बनाया गया है। लेकिन डौंडी शाखा के जिला सहकारी बैंक वाले अपनी बड़ी लापरवाही व गलती मानने के बजाय किसानों पर ही दोष मढ़ने में लगे हुए हैं। अब मामला सामने आने पर एक किसान का एटीएम ब्लाक करने की बात कर रहे है।

मामला डौंडी नगर के वार्ड क्रमांक 15 निवासी पीड़ित किसान जीवराखन लाल निषाद का है। जिसका जिला सहकारी बैंक में खाता क्रमांक 601019024599 है। उनके द्वारा अपने खाता से बगैर राशि निकासी किए अलग-अलग तारीख पर तीस हजार रुपये निकलने की घटना घट गई है। मामले का खुलासा तब हुआ जब इस बैंक ने स्वयं जिवराखन के खाते की पास बुक में बिना राशि निकाले दो बार तीन हजार रुपये की कम होने की इंट्री करके दे दी गई। तब पीड़ित को यह अहसास भी नहीं था कि उनके खाते से तीस हजार की राशि हेराफेरी हो गई है। उसे करीब दस हजार राशि गड़बड़ी की भनक लग रही थी। पीड़ित किसान के मुताबिक जब वह बैंक पहुंचकर इस संबंध जानकारी लेना चाहा तो उसे जानकारी नहीं दी गई। जिसके बाद पीड़ित ने अपना दुखड़ा किसी जानकार को बताकर उसे उक्त बैंक लेकर गया। यहां पर भी पीड़ित और साथ गए व्यक्ति को दूसरे दिन आने की सलाह दे दिया गया। लेकिन वापस लौटाने से पहले बैंक के एक कर्मचारी ने खाता क्रमांक व खाते में लिखा मोबाइल नंबर लिखकर पूछा कि यह मोबाइल कौन रखता है।

जिस पर जिवराखन ने अपने पुत्र का नाम बताया फिर बैंक कर्मचारी ने दोनों को वापस भेज दिया। उनके वापस जाते ही उक्त बैंक कर्मचारी ने जिवराखन के पुत्र नंदकुमार निषाद को तत्काल फोन किया और यह कहकर बैंक बुला लिया कि आपके पिता के खाते से हुई राशि गड़बड़ी की जानकारी हो गई है। आप बैंक आ जाइये। बैंक पहुचने पर उक्त बैंक कर्मचारी ने नंदकुमार से कहा कि कैसे-कैसे आदमी को लेकर तुम्हारे पिता पहुंच जाते है। फिर बैंक कर्मचारी ने नंदकुमार निषाद को बताया कि ग्राम मरकाटोला निवासी गैंदलाल पुत्र देवलसिंह जिसका खाता क्रमांक 101002024309 है। उक्त खाता क्रमांक के एटीएम कार्ड द्वारा अलग-अलग तिथि में तुम्हारे पिता जिवराखन लाल के खाते की रकम निकल गया है। इसलिए उसे भी बैंक बुलाया गया है। जिसके बाद गैंदलाल और पीड़ित किसान के बेटे नंदकुमार को विश्वास में लेकर दोनों पक्षों की आपसी सहमति यह कहकर करा दी गई है कि यह दोष एटीएम में तकनीकी खराबी का है। इसके बाद जिवराखन के खाते में तीस हजार रुपये जमा करना बताया गया है। इस सहमति बाद जिवराखन के पुराने खाता पास बुक को तुरंत बंद कर नया खाता बनाकर दे दिया गया। साथ ही जिवराखन लाल का एटीएम ब्लाक करा इसे दोबारा शुरू न कराने तथा अब पासबुक से ही जमा राशि निकालने की सलाह दे दी गई।

यही नहीं दूसरा पक्ष गैंदलाल जिसके एटीएम द्वारा फर्जी तरीके से राशि आहरण हो रहा था उसका भी एटीएम ब्लाक कर कुछ दिनों बाद उसे नया एटीएम बैंक द्वारा उपलब्ध कराने राजी कर लिया गया। इस तरह जिला सहकारी बैंक का यह तर्क कि एटीएम में तकनीकी खराबी वश गलती से ऐसा हो गया। बैंक वालों की एक के बाद एक नए कारनामों को उजागर कर रहा है। इससे समझा जा सकता है कि इस बैंक में ऐसे और भी कई मामला होंगे जो अनभिज्ञ किसान मामले को लेकर अभी सामने नहीं आ पाए हैं। परंतु अपनी घटना को लेकर जिवराखन लाल का कहना है कि मामले की उधास्तरीय जांच होनी ही चाहिए। तथा हेराफेरी करने वालों को उचित दंड मिलना चाहिए, ताकि और किसी किसानों की गाढ़ी कमाई के साथ इस तरह का खिलवाड़ न हो सके और किसानों का विश्वास भी इस बैंक पर सदैव बना रहे।