बालोद नईदुनिया न्यूज। ग्राम पंचायत सांकरा (ज) के अंतर्गत सुंदरा जहां गांव के लोगों ने रविवार को बैठक कर रक्षाबंधन और तीज पर्व पर बेटियों को न बुलाने और बहुओं को मायके नहीं भेजने का निर्णय लिया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए ग्रामीणों ने बैठक में चर्चा की। गांव के सभी बुजुर्गों के निर्णय पर मोहर लगाने के साथ ही संकल्प लिया कि रक्षाबंधन पर न ही कोई बहन आएगी और न ही कोई बहू मायके जाएगी। इस तरह का निर्णय खासकर उन पढ़े लिखे लोगों के लिए बड़ी चुनौती है। जो कोरोना संक्रमण जैसी महामारी के लगातार बढ़ने के बाद भी बेवजह सड़क पर निकल कर शासन-प्रशासन के नियमों की धज्जिायां उड़ा रहे हैं। ग्राम सुंदरा के साथ-साथ ग्राम पंचायत खपरी में भी ग्रामीणों ने इसी तरह का निर्णय लिया।

जिला प्रशासन से मिली प्रेरणा

जिले में लगातार कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद प्रशासन संक्रमण को रोकने के लिए कारगर कदम उठाए जाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी करा करा कर लोगों को जागरूक कर रहा है। जिसके बाद ग्रामीणों के इस निर्णय का जिला प्रशासन ने सराहना की।

जरूरत पड़ने पर अपना रहे सख्ती

एक ओर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जागरूक होकर बहन-बेटियों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा रहे हैं वहीं शहरी क्षेत्र में लोग शासन के समस्त नियमों का धत्ता बनाते हुए बिना मास्क के ही बाजारों की भीड़ बढ़ा रहे हैं। हालांकि ऐसे लोगों पर प्रशासन के साथ-साथ पुलिस व नगरपालिका की टीम जुर्माना वसूल रही है। बावजूद इसके लोग अब तक नहीं समझ पा रहे हैं कि कोरोना संक्रमण जिले वासियों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। गत दिनों बिना मास्क लगाए सामान बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की गई थी।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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