बालोद (नईदुनिया न्यूज)। जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में कोरोना केस बढ़ता जा रहा है। लगातार जिले में नए-नए मरीज मिल रहे हैं। वही आंकड़ा भी पूरी तरह से बढ़ते क्रम पर है। ऐसे में अब लोगों में खतरा भी बढ़ने लगा है। वहीं कोरोना पॉजिटिव लोग होम आइसोलेशन की भी मांग कर रहे हैं। क्योंकि कई बार अस्पताल में भर्ती के दौरान कम संक्रमित लोग दूसरे मरीज के संपर्क में आने से गंभीर हो रहे हैं। सरकार ने होम आइसोलेशन की छूट भी दे दी है लेकिन कई लोगों को इसकी जानकारी न होने के चलते लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। जिला प्रशासन से इस संबंध में जन जागरूकता पर चर्चा में कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने विभिन्ना नियमों के बारे में जानकारी दी।

जिसको लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग सहित कोरोना से जुड़े अन्य विभाग के अफसरों को निर्देश दिया है कि लोगों को इस बारे में बताएं ताकि सुविधा लेकर अपने घर पर इलाज करवा सकें। ज्ञात हो कि पिछले दिनों गुंडरदेही ब्लाक के ग्राम गब्दि में प्रशासन जब सात कोरोना मरीजों को अस्पताल शिफ्ट करने के लिए गया तो वहां इसी बात को लेकर विरोध होने लगा कि हम होम आइसोलेशन में रहना चाहते हैं। लेकिन उस समय तत्कालिक में कोई सुविधा न होने के चलते प्रशासन उन्हें सुरक्षित आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करने ले गई। प्रशासन की समझाइश के बाद मरीज राजी हुए इलाज करवा रहे हैं। कई बार ऐसी स्थिति आती है कि मरीज अस्पताल में ही इलाज करवाना पसंद नहीं करते हैं। उनके लिए यह जानना भी जरूरी है कि आखिर इस होम आइसोलेशन का नया नियम क्या क्या है। कैसे हम इसका पालन करके घर पर ही स्वस्थ हो सकते हैं। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने होम आइसोलेशन को लेकर नई गाइड लाइस भी जारी की हैं

क्या है नई गाइड लाइन

अपर कलेक्टर एके वाजपेयी ने बताया कोरोना के ऐसे मरीज जिन्हें हल्के लक्षण हैं। शुरुआती लक्षण है या फिर कोई लक्षण नहीं हैं। उन्हें होम आइसोलेशन में रहना होगा। उनके घरवालों को भी क्वारंटीन रहना होगा।

कैसे मरीज होम आइसोलेशन में रह सकते हैं

डॉक्टर या मेडिकल ऑफिसर से सलाह लेना जरूरी है। जब डॉक्टर ये कहेगा कि मरीज को हल्के लक्षण हैं, या शुरुआती लक्षण हैं या फिर कोई लक्षण नहीं हैं। तभी वो होम आइसोलेशन में जा सकते हैं। इसके अलावा मरीज को खुद एक फॉर्म भी साइन करना होगा। जिस पर लिखा होगा कि वो होम आइसोलेशन के नियमों का कड़ाई से पालन करेगा। मरीज के घर पर होम आइसोलेशन और परिवार वालों को क्वारंटीन रखने के लिए सारी जरूरी सुविधा हो। जैसे अलग-अलग कमरे हों वगैरह। अगर मरीज एचआईवी, अंग प्रत्यारोपण या कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज करवा रहा हो, तो वो होम आइसोलेशन में नहीं रह सकता। 60 वर्ष से ऊपर के मरीज और जो हाइपरटेंशन, डायबिटीज, दिल की बीमारी, लंग, लिवर, किडनी से जुड़े बीमारियों के मरीज हों, उन्हें तभी होम आइसोलेशन में रखा जाएगा, जब मेडिकल ऑफिसर अच्छे तरह से उनकी जांच न कर ले। एक देखभाल करने वाले व्यक्ति को चौबीसों घंटे मरीज की सेवा में मौजूद रहना होगा। जो समय-समय पर डिस्ट्रिक्ट सर्विलेंस ऑफिसर (जिला निगरानी अधिकारी) को मरीज से जुड़े अपडेट्स देता रहेगा।

देखभाल करने वाले और मरीज के सभी करीबियों को जो उसके साथ होम क्वारंटीन हैं। उन्हें मेडिकल अधिकारी के कहने पर और प्रोटोकॉल के हिसाब से हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन, प्रोफिलेक्सिस खानी होगी। सभी के फोन पर आरोग्य सेतु एप होना चाहिए।

मरीज को रोजाना अपने हेल्थ को मॉनिटर करना होगा, और सारी जानकारी जिला निगरानी अधिकारी को देनी होगी।

कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं

मरीज को हर वक्त ट्रिपल लेयर मेडिकल मास्क पहनकर रहना होगा। जिसे हर आठ घंटे बाद या फिर उसके गंदे और गीले होने की कंडिशन में फेंकना होगा। फेकने से पहले मास्क को एक फीसद सोडियम हाइपो-क्लोराइट से डिस-इन्फेक्ट करना होगा। यानी शुद्घ करना होगा, ताकि उससे वायरस न फैले।

मरीज को अपने ही कमरे में रहना होगा। घर के सभी लोगों से दूर. खासतौर पर बुजुर्गों के टच में आना ही नहीं है। ज्यादा से ज्यादा आराम करना है, तरल पदार्थ पानी व जूस पीते रहना है।

साबुन से बार-बार हाथ धोना है। सैनिटाइजर का इस्तेमाल भी करते रहना है। निजी सामान किसी के साथ गलती से भी शेयर नहीं करना है। कमरे को 1फीसद हाइपो-क्लोराइट सॉल्यूशन से बार-बार साफ करना है। डॉक्टर जो भी सलाह दे, उसका कड़ाई से पालन करना है। रोजाना शरीर का तापमान नापना है। अगर सेहत में जरा भी गड़बड़ी लगे तो अधिकारियों को खबर करना है।

अधिकारियों का क्या रोल है

राज्य या जिले के स्वास्थ्य अधिकारी होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीज से लगातार कांटैक्ट में रहें। फील्ड स्टाफ या सर्विलेंस टीम समय-समय पर मरीज की हेल्थ को जांचने पर्सनल विज;टि करें. कॉल सेंटर के ज;रिए भी मरीज की स्थिति के बारे पता करते रहें.

मरीज के शरीर का तापमान, पल्स रेट और ऑक्सीजन की मात्रा के बारे में पता करते रहें। फील्ड स्टाफ मरीज के फैमिली मेंबर्स और सभी क्लोज कांटैक्ट की सेहत का जायजा लें और प्रोटोकॉल के अनुसार टेस्ट करें।

मेडिकल हेल्प कब लें

मरीज को अगर सांस लेने में दिक्कत हो, ऑक्सीज लेवल कम हो, सीने में दर्द हो या दबाव महसूस हो। भ्रम की स्थिति पैदा हो, कमजोरी लगे। ठीक से बोलते न बने। चेहरा या लिप्स नीले पड़ने लगे तो तुरंत जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करना है।

कब खत्म होगा होम आइसोलेशन

लक्षण सामने आने के दस दिन बाद और लगातार तीन दिन तक बुखार न आने पर मरीज को होम आइसोलेशन से डिस्चार्ज माना जाएगा। उसके बाद भी मरीज को लगातार सात दिन तक आइसोलेट रहना होगा और अपनी सेहत को मॉनिटर करते रहना होगा। होम आइसोलेशन का वक्त खत्म होने के बाद दोबारा टेस्टिंग की कोई जरूरत नहीं है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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