दल्लीराजहरा (नईदुुनिया न्यूज)। मौसम के लगातार बिगड़ रहे मिजाज के बाद किसानों को अपनी धान की चिंता सताने लगी है। इसे लेकर वे जल्द ही धान की मिसाई करके खलिहान तक ला सके। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण अंचलों में धान की कटाई अब तेज गति से शुरू हो चुकी है। काफी बड़े रकबे में किसानों द्वारा धान की कटाई की जा रही है, लेकिन वर्तमान हालत में जो सबसे बड़ी समस्या आ रही है वह मिंजाई किए हुए धान के रखरखाव को लेकर। एक समय था जब किसान धान की मिंजाई करने के बाद उसे सहेज कर घर में बने हुए ढोली व ढाबा में सुरक्षित रखा करते थे, किंतु राज्य शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत करने के बाद से एक तरह से धान को सुरक्षित रखने की बात अब एक तरह से किस्सा कहानी बनकर रह गई है।

क्योंकि किसान अपनी उत्पादन को राज्य शासन द्वारा की जा रही धान समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के तहत बेच दिया करते हैं। जिसके चलते धान को वे अब नहीं सहेजते हैं। किंतु इस वर्ष हालात कुछ विपरीत से नजर आ रहे हैं। किसानों के धान तो खलिहान तक पहुंच चुके हैं या पहुंचना शुरू हो गए हैं। किंतु समर्थन मूल्य की तारीख अब तक घोषित नहीं की जा सकी है, हालांकि अब तक जो छनकर खबरें आई हैं। उसके अनुसार एक दिसंबर से धान की खरीदी राज्य शासन द्वारा शुरू करने की बात कही जा रही है। किंतु उक्त जानकारी भी किसान अधिकृत रूप से नहीं मान रहे हैं। बहरहाल, उपरोक्त हालात के चलते किसानों के सामने अब इस बात की चिंता सताने लगी है कि जिस तरह से लगातार मौसम के बिगड़ते हुए मिजाज आए दिन देखने को मिल रहे है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक धान को सहेजे रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।

राजनीतिक दल उलझे कृषि बिल के समर्थन और विरोध में

एक ओर जहां किसान अपनी एक अहम समस्या से जूझ रहे हैं कि वे धान को कैसे सुरक्षित रख पाएंगे। वहीं दूसरी ओर किसानों की इस अहम समस्या से राजनीतिक दलों को किसी तरह का कोई सरोकार नहीं रह गया है। राजनीतिक दल सिर्फ और सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा घोषित कृषि बिल के समर्थन और विरोध में उलझे हुए नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित कृषि बिल को जन हितैषी, किसानों की हितैषी बताकर वाहवाही लूट रही है, वही प्रदेश में सत्ता पक्ष के कांग्रेसी इसके विरोध में एक तरह से अभियान से छेड़ दिए हैं तथा इस बिल के विरोध में एक तरह से रणनीति बनाने में लगे हुए हैं। जबकि आज किसानों को आज प्रदेश के किसानों को कृषि बिल के समर्थन में विरोध की नहीं बल्कि धान की बेचने की समस्या है, जिससे किसी जनप्रतिनिधि को कोई सरोकार नहीं रह गया है। इसे लेकर किसान वर्ग में भारी आक्रोश तथा रोष देखा जा रहा है। किसानों में इस बात को लेकर जो प्रतिक्रिया आई है। उसमें किसान वर्ग इस बात को स्वीकारते हैं कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित कृषि बिल के फायदे और नुकसान से किसानों को बाद में नजर आएंगे, किंतु आज के हालात में किसानों को तो सिर्फ नुकसान ही नजर आ रहा है। इन तमाम हालातों के बाद भी किसानों का ध्यान सिर्फ और सिर्फ फसल को सहेजने में लगा हुआ है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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