डौंडी/दल्लीराजहरा (नईदुुनिया न्यूज)। आदिवासी वनांचल क्षेत्र के डौंडी ब्लाक के ग्रामीण अंचल में ऐसी कई विशिष्ट परंपराएं हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी प्राचीन काल से चली आ रही हैं। नईदुनिया लगातार अपने पाठकों को आदिवासी वनांचल की विशिष्ट संस्कृति पर्यटन स्थल एवं अनूठे सभ्यता तथा परंपरागत मान्यताओं से रूबरू करा रहा है।

ऐसे तो डौंडी सहित बालोद जिला में ही किसानों का पूरा त्योहार धान की फसल के इर्द-गिर्द होता है। इन्ही में से एक मुख्य रूप से मनाया जाने वाला त्योहार है चरू। जिसे किसान बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। अंचल के विभिन्न क्षेत्रों में चरु विधान अलग-अलग दिन मनाया जाता है। किसान नारायण भोयर बताते हैं कि इस आयोजन में गांव के सभी किसान खेत समीप कहीं मैदानी जगह पर एकत्र होते हैं। जहां पूजा के लिए निर्धारित जगह में सभी किसान अपने साथ फूल, चावल, नारियल, अगरबत्ती लेकर पहुंचते हैं। कई लोग मुर्गा भी लेकर आते हैं, ताकि इससे देवताओं को खुश किया जा सके। किसान देवकुमार, तिहारू राम गोड़, आगास राम ने बताया कि चरू के पहले यदि कोई किसान धान काट कर घर में लाता है तो इससे अपशकुन के तौर पर देखा जाता है। चूंकि आजकल जल्द पकने वाली कई किस्म के धान तैयार हो चुके हैं। किसी किसान की फसल समय से पहले पक कर तैयार हो जाता है तो उसे वाहन के बजाये कांवर से ढ़ोकर घर तक लाना होगा और देवता को दंड के तौर पर एक नारियल एवं एक बोतल महुए की शराब चढ़ाने का प्रावधान है। बताया गया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है तथा परंपरा के अनुसार धान को खलिहान में लाने एवं बैलगाड़ी या ट्रैक्टर में डालने से पहले यह पूजा जरूरी है।

चरु की पूजा में स्त्रियों की भागीदारी वर्जित

इस दिन देवता को मुर्गे एवं सूअर की बलि चढ़ायी जाती है, ताकि इससे देवता को प्रसन्ना किया जा सके। देवता को मुर्गे एवं सूअर की बलि चढ़ाने के बाद उसी से सभी के लिए भोजन की व्यवस्था होती है। शाकाहारी भोजन की भी यहां व्यवस्था होती है। घर से लोग चावल भी लेकर पूजा स्थल पर पहुंचते हैं वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस पूजा में स्त्रियों की भागीदारी पूर्णतः वर्जित है।

मुर्गियों को दाना चुगाने का है विशेष महत्व

किसान फागूराम बताते हैं कि कई क्षेत्रों में चारों विधान में मुर्गियों को दाना चुगाने का विशेष मान्यता है। पूजा स्थल में ग्रामीण लगभग 20-25 मुर्गियों को लेकर पहुंचते हैं। मुर्गियों को दाना चुगाया जाता है। यदि मुर्गियां दाना चुगती हैं तो यह माना जाता है कि कार्यक्रम सफल हो गया तथा धान की फसल के संग्रहण में किसी प्रकार की अनिष्टता की संभावना नहीं होगी। यदि दाना नहीं चुगती हैं तो इसके लिए मनाने का प्रयास किया जाता है। जब मनाने के बाद मुर्गियां दाना चुगती हैं तो चरू विधान की अन्य रस्में पूरी की जाती हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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