कटगी। आदर्श ग्राम पंचायत कटगी के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बुधवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार उत्साह के साथ मनाया। ईदूल अजहा की नमाज मौलाना सलमान रजा ने ठीक 8.30 बजे पढ़ाई।

वहीं मौलाना सलमान रजा ने तकरीर के दौरान बताया कि आखिर क्यों ईदूल जोहा (बकरीद) मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान में बकरीद का स्पष्ट वर्णन मिलता है। ऐसा बताया जाता है कि अल्लाह ने एक दिन हजरत इब्राहिम अलैहवस्सलम के सपने में उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी। हजरत इब्राहिम अलैस्सलाम अपने बेटे इस्माईल अलैस्सलाम से बहुत प्यार करते थे, लिहाजा उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया। अल्लाह का हुकुम मानते हुए हजरत इब्राहिम अलैस्सलाम जैसे ही अपने बेटे की गर्दन पर वार करने गए, अल्लाह ने उसे बचाकर एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी। तभी से इस्लाम धर्म में बकरीद मनाने का प्रचलन शुरू हो गया। ईद-उल-जुहा यानी बकरीद हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में ही मनाया जाता है। हजरत इब्राहिम अलैस्सलाम अल्लाह के हुकुम पर अपनी वफादारी दिते हुए अपने बेटे इस्माइल अलैस्सलाम की कुर्बानी देने को तैयार हुए थे। बकरीद का पर्व इस्लाम के पांचवें सिद्घांत हज को भी मान्यता देता है। बकरीद के दिन मुस्लिम बकरा, भेड़, ऊंट जैसे किसी जानवर की कुर्बानी देते हैं। बकरीद के दिन कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक खुद के लिए, दूसरा सगे-संबंधियों के लिए और तीसरा गरीबों के लिए। इस पर्व पर इस्लाम धर्म के लोग साफ-पाक होकर नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ते हैं। नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू होती है। बाद नमाज देश में फेले कोरोना वायरस बीमारी से निजात पाने की दुआ अल्लाह तआला से मांगी गई। अंत में कब्रिस्तान पहुंच कब्र में सोए हुए मरहुमो की मगफिरत की दुआ खैर की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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