बलौदाबाजार। नईदुनिया न्यूज

शहर या गांव मोहल्ले के सरकारी राशन दुकानों में गरीबों के हक पर डाका डाला जा रहा है। बोरी में 50 किलो के बजाय 47 या 48 किलो ही दिया जाता है। ऐसी कई शिकायतें हितग्राहियों द्वारा की जा रही है। मगर जिम्मेदार खाद्य विभाग के अधिकार कार्रवाई करने के बजाय शिकायत आने का इंतजार कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी कह रहे हैं ऐसी शिकायत किन दुकानों में है उसकी नाम समेत शिकायत आने पर कार्रवाई करेंगे।

सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वालों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन इसका पर्याप्त लाभ जिसको मिलना चाहिए उसको सही ढंग से नहीं मिल पा रहा है। अधिकारी-कर्मचारी ही योजना के तहत घपला कर मालामाल हो रहे हैं। इसका सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। जिले में सैकड़ों राशन दुकानों में प्रति माह हजारों मिट्रिक टन चावल का वितरण होता है। जिसमें कई जगहों पर सेल्समैन द्वारा गरीबों के पेट पर डाका डाला जा रहा है।

गरीबों को उसके हक का चावल मिलना चाहिए, उतना उनको नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में दो माह का चावल एक साथ दिया जाता है। ऐसे में जहां एक परिवार में सात से 8 सदस्य है उनको एक कट्टा चावल के साथ बाकी खुला दिया जा रहा है। एक कट्टा चावल का वजन 50 किलो होता है मगर वजन कम निकल रहा है। ऐसी ही शिकायत शहर, ग्राम गैतरा सहित कुछ गांवों के राशन दुकानों से मिल रही है।

वजन करवा कर ही लें चावल

जब भी चावल लेने राशन दुकान पहुंचे तो आप वजन कराकर ही चावल लें। बिना वजन कराए चावल न लें। अगर सेल्समैन वजन करने से मना करता है तो आप जिला खाद्य विभाग से शिकायत कर सकते हैं।

जिले में 3 लाख 11 हजार 347 राशनकार्ड धारी

जानकारी के अनुसार जिले में कुल 3 लाख 11 हजार 347 राशनकार्ड जारी किए गए हैं। इनमें 214 अति गरीब यानी जिसके पास कुछ भी नहीं है। 3 हजार 678 परिवार ऐसे हैं, जिनको पीडीएस से मुफ्त राशन सामान मिलता है। इसके अलावा अंत्योदय गुलाबी कार्ड की संख्या 57 हजार 207, नीला प्राथमिकता 2 लाख 49 हजार 565, हरा निःशक्तजन 683 है। 639 पीडीएस की दुकानों के जरिए लोगों को राशन मिल रहा है। नगरीय निकाय के अंतर्गत 39 हजार 403 राशन कार्ड जारी हुए हैं।

तुरंत कट जाता है नाम, जोड़ने में लगते हैं महीनों

वर्तमान में प्रति व्यक्ति सात किलो के हिसाब से चावल दिया जाना है लेकिन हितग्राही के परिवार मे किसी सदस्य की मृत्यु होने या लड़की का विवाह होने पर नाम तुरंत काट दिए जाने की बात कहकर उसके हिस्से का चावल नहीं दिया जाता है तथा दूसरी जगह बेच देते हैं या अपने उपयोग के लिए रखते हैं मगर नाम जुड़वाना हो तो महीनों लग जाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network