बलौदाबाजार। नईदुनिया न्यूज

सीमेंट संयंत्र से पीड़ित एक किसान को नईदुनिया की पहल से न्याय मिला। नईदुनिया ने इस मुद्दे को हर मंच पर उठाया था और आखिरकार पीड़ित किसान सालिगराम वर्मा को न्याय मिल गया। 16 अगस्त 2019 को अंबुजा सीमेंट संयंत्र ने दो लाख सत्तर हजार रुपये का चेक सन 2014 से 2018 तक की क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़ित किसान को दिया। साथ ही संयंत्र ने किसान की भूमि से अपना अवैध कब्जा छोड़ा। वहीं किसान को उसकी भूमि में आने जाने का मार्ग दे दिया गया है। अब किसान अपनी भूमि पर खेती कर अपनी आजीविका चला सकता है।

उल्लेखनीय है कि बलौदाबाजार जिला मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर दूर ग्राम भरसेली के एक गरीब किसान ने एक बड़े बहुराष्ट्रीय सीमेंट प्लांट द्वारा शोषण व अत्याचार से तंग आकर सपरिवार आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। किसान सालिग राम वर्मा की 0.463 हेक्टेयर की उपजाऊ भूमि सीमेंट संयंत्र के खदान क्षेत्र में आ गई थी। सीमेंट संयंत्र ने किसान से जमीन बिना खरीदे ही 2014 में उसकी जमीन को चारों ओर से घेर दिया और अपने खदान से निकाले हुए मलबे से पाट दिया। किसान द्वारा विरोध करने पर किसान के पुत्र को सीमेंट संयंत्र में स्थायी नौकरी देने का प्रलोभन दिया गया। इस प्रलोभन से प्रभावित होकर और पुत्र के भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए गरीब किसान द्वारा अपने पुत्र गजेंद्र को महंगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई गई। इस बीच संयंत्र द्वारा भूमि को बेच देने के लिए लगातार दबाव बनाया गया, लेकिन भविष्य की आशंका से ग्रसित होकर किसान सालिग राम ने अपनी भूमि नहीं बेची। अब किसान सालिग राम का पुत्र गजेंद्र इंजीनियर बन चुका है, किसान ने संयंत्र से गुहार लगाई कि अपने वादे के अनुसार मुझे मेरी जमीन का मुआवजा और मेरी इंजीनियर पुत्र गजेंद्र को सीमेंट संयंत्र में स्थाई नौकरी दे। 2014 से संयंत्र द्वारा किसान सालिग राम वर्मा की जमीन पर अवैध कब्जे के बावजूद, सीमेंट संयंत्र अब ना उनको उनकी जमीन का मुआवजा दे रहा था और न उनके पुत्र गजेंद्र को नौकरी। गरीब किसान सालिग राम वर्मा की जिंदगी भर की जमा पूंजी पुत्र को इंजीनियर बनाने में खर्चा हो गई है और आजीविका का एकमात्र साधन उनकी कृषि भूमि पर अब खेती भी नहीं कर सकते थे। संयंत्र द्वारा उनकी कृषि भूमि बंजर कर दी गई। भूमि को चारों ओर से घेरा जा चुका था। पहुंच मार्ग समाप्त हो चुका है, और खदान क्षेत्र में संयंत्र के सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। किसान अब चाह कर भी अपनी भूमि पर नहीं जा सकता। परेशान किसान और उसके परिवार ने इस मुद्दे पर कई बार शासन प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। सीमेंट संयंत्र के प्रबंधकों से मुआवजे के लिए बार-बार आग्रह किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार इससे दुखी और परेशान होकर किसान सालिग राम और उसके परिवार ने सीमेंट संयंत्र के गेट के सामने 31 जुलाई 2019 को सामूहिक आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी।

सेमेंट प्रबंधन और किसान के बीच हुई थी बैठक

पूर्व में घटित घटना क्रम में जिला प्रशासन द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के पश्चात कलेक्टर कार्तिकेय गोयल के निर्देश पर तहसीलदार बलौदाबाजार गौतम सिंह एवं बलौदाबाजार थाना प्रभारी कृष्ण कुमार कुशवाहा की मध्यस्थता में 30 जुलाई को सीमेंट प्रबंधन और पीड़ित किसान के मध्य बैठक हुई। अंबुजा सीमेंट संयंत्र की ओर से महाप्रबंधक कैप्टन अजय सिंह रखवाल और रमेश मिश्रा उपस्थित हुए और पीड़ित किसान परिवार से किसान सालिगराम वर्मा और किसान पुत्र गजेंद्र वर्मा उपस्थित हुए। बलौदा बाजार तहसीलदार के ऑफिस में हुई। तीन घंटे की बैठक के बाद तहसीलदार गौतम सिंह एवं थाना प्रभारी कृष्ण कुमार कुशवाहा की उपस्थिति में आपसी समझौते पत्र पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें अंबुजा सीमेंट प्रबंधन की ओर से कब्जा हटाया जाना और क्षतिपूर्ति देना स्वीकार किया गया था। 16 दिन के कठिन इंतजार और उपापोह की स्थिति के बाद आखिरकार किसान को न्याय प्राप्त हुआ है।