भाटापारा। आने वाले विधानसभा चुनाव के पहले भाटापारा विधानसभा क्षेत्र, बदलाव की संभावना खोज रहा है। प्रदेश में जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनेगी, भाटापारा को स्वतंत्र जिले का दर्जा मिलेगा। 9 वर्ष पूर्व दिग्गज कांग्रेसी नेता नंद कुमार पटेल की यह घोषणा, शायद पार्टी भूल चुकी है, तभी तो तीन नए जिले और बन गए लेकिन पहली दावेदारी भूला दी गई। अब इस दावेदारी की अनदेखी भारी पड़ने की संभावना बनती नजर आती है क्योंकि हर मामले में की जा रही उपेक्षा से उपजी नाराजगी निचले स्तर तक पहुंच चुकी है।

भूपेश ने कहा था जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनेगी, तुरंत मिलेगा दर्जा : 2018 में आदिवासी सम्मेलन में प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, डा. चरणदास महंत, डा. शिवकुमार डहरिया और राजकमल सिंघानिया की मौजूदगी में भूपेश बघेल ने कहा था कि जैसे ही कांग्रेस की सरकार प्रदेश में आएगी वैसे ही भाटापारा को स्वतंत्र जिले का दर्जा मिलेगा। तीन साल बीत चुके हैं, शायद मुख्यमंत्री भूल गए कि जो घोषणा भाटापारा को लेकर उन्होंने की थी उसे लेकर सवाल पूछने की तैयारी चालू हो चुकी है।

भाजपा से भी नाराजगी : 15 साल तक बिना बाधा के प्रदेश में सरकार चलाने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से भी शहरवासी नाराज हैं। नाराजगी के बावजूद उसके प्रत्याशी को जीत दिला कर भरोसा जताया। अब यह भरोसा और विश्वास पूरी तरह टूट चुका है क्योंकि जैसी उपेक्षा भाजपा ने अपने शासनकाल में भाटापारा विधानसभा क्षेत्र में की, उसकी मिसाल शायद ही प्रदेश में मिले। हकदार था अपना शहर, स्वतंत्र जिले का, लेकिन वोट की राजनीति हमेशा भारी पडती रही। सो गुस्सा इनसे भी है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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