बलौदाबाजार। केरल पहुंचने के बाद छत्तीसगढ़ तक मानसून को आने में अमतौर पर आठ से दस दिन का समय लगता है। अभी तक मानूसन के आगे बढ़ने को लेकर परिस्थितियां अनुकूल है। अब मानसून ने बस्तर में दस्तक दे दी है। कुछ दिनों में पूरे राज्य बारिश शुरू हो जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 14 साल के आंकड़े देखें तो 2005 में 24 जून और 2009 में 26 जून को मानसून सबसे ज्यादा लेट यहां पहुंचा था। जबकि 2006 का साल ऐसा था जब मानूसन तय समय से हफ्ताभर पहले 6 जून को ही छत्तीसगढ़ पहुंच गया था। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिणी-पश्चिमी मानसून ज्यादातर मौकों पर तय समय के आसपास पहुंच जाता है। हालांकि केरल के बाद इसके आगे बढ़ना अनेक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। वहीं छग में कई मौके ऐसे भी रहते हैं जब वहां स्थानीय प्रभाव से बारिश होती रहती है। छत्तीसगढ़ के दक्षिणी क्षेत्र के रास्ते मानसून आमतौर पर 10 से 20 जून के अंदर पहुंच जाता है। यहां आने के बाद अगले 24 घंटे में राजधानी के आसपास के ज्यादातर इलाकों में असर दिखना शुरू हो जाता है।

इस साल 12 % कम बारिश

मौसम विभाग के अनुसार 20 साल पहले तक मानसून प्रदेश में 10 जून तक आ जाता था। 10 जून के बाद पूरे प्रदेश में बारिश शुरू हो जाती थी। लेकिन औद्योगीकरण और जंगलों से पेड़ों की कटाई के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है और मानसून लेट आ रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो इस बार बारिश भी 12 फीसद कम होगी। छत्तीसगढ़ में बदली और उमस पश्चिमी हवाओं के कारण है, जिस कारण लोकल सिस्टम के कारण क्षेत्रीय वर्षा हो रही है। मानसून देर से आने के कारण ही वर्षा कम होने की संभावना भी बन रही है। हल्की बदली के साथ उमस ने लोगों को बेचैन कर दिया और शहर का अधिकतम तापमान पिछले तीन दिनों से 43 पर टिका हुआ है। मानसून ने बस्तर में प्रवेश कर लिया है। इसके बाद पूरे छत्तीसगढ़ में फैल जाएगा।

वर्ष मानसून आने की तिथि वर्ष मानसून आने की तिथि

2001- 09 जून 2008- 10 जून

2002- 11 जून 2009- 26 जून

2003- 17 जून 2010- 14 जून

2004- 13 जून 2011- 15 जून

2005- 24 जून 2012- 19 जून

2006- 06 जून 2013- 08 जून

2007- 18 जून 2014- 19 जून

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