खरोरा। नगर में आयोजित भागवत कथा के बाल व्यास मौलश्री ने उद्घव प्रसंग को बहुत प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे श्रोतागण भावविभोर होकर भावुक हो गये। बाल व्यास ने कहा कि जब गोपियों को ज्ञात हुआ कि उद्धव, श्री कृष्ण का कोई संदेश लेकर आए हैं, तो वे अपने प्रियतम का संदेश जानने के लिए अत्यंत व्यग्र हो गईं। जब मनभावन श्रीकृष्ण द्वारा भेजे गए दूत उद्घव के आगमन की सूचना गोपियों को मिली, तो वे समूह में दौड़-दौड़कर अपने प्रियतम के दूत से मिलने के लिए नंद के द्वार पर आने लगीं। अपने कमलरूपी चरणों के पंजों पर उचक-उचककर वे श्रीकृष्ण द्वारा भेजे गए पत्र को देखने लगीं। सभी गोपियों का हृदय क्षोभ से भर उठे। सभी गोपियां कहने लगीं कि श्रीकष्ण ने उनके लिए क्या लिखा है। हमारे लिए कृष्ण ने क्या संदेश भेजा है। इस प्रकार सभी गोपियां अपने-अपने नाम के संदेश को सुनने को व्याकुल होने लगीं।

उद्घव के द्वारा न कहने योग्य कहानी अर्थात योग्य संबंधी असह्य एवं निष्ठुर संदेश अपने कानों से सुनकर गोपियों की दशा अत्यन्त दुःखमय हो गई। व्यास जी ने कहा निष्ठुर संदेश को सुनकर कोई क्रोधित हो गई है, तो कोई शोकवश विलाप करने लगी एवं कोई विकल हो गई। उनमें से कोई शिथिल हो गई, कोई घबड़ाहट के चलते पसीने से भींग गई, तो कोई कृष्ण के वियोग में दुःख से रोने लगी और उनकी आंखों में पानी भर आया। किसी को इतना दुःख हुआ कि वह मूर्छित होकर गिर गई। कोई श्याम-श्याम कहते हुए आवेश में तड़पने लगी एवं कोई अपने कोमल कलेजे को पकड़कर भय से सूख गई। 13 वर्ष की बाल व्यास की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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