मारकंडेय उपाध्याय, बलौदा बाजार। पूरा देश शनिवार को जहां एकादशी मना रहा था, बलौदाबाजार जिले के ग्राम भरसेला का डहरिया परिवार दिवाली मनाने में लगा था। ऐसा हो भी क्यों ना? बांग्लादेश की जेल में सालभर से कैद जवान बेटा पुलिस की मदद से सकुशल घर जो लौटा था। लक्ष्मी पूजा यानी दिवाली पर पूरा गांव दीयों की रोशनी से जब जगमगा रहा था, इस घर में अंधियारा बिखरा था। एकादशी इनके लिए खुशियों का पैगाम और उजाला लेकर आया। ग्राम भरसेला निवासी रामेश्वर डहरिया का बेटा युवराज (26) करीब सालभर पहले ससुराल राजाढार से घर के लिए अकेले निकला, तब से लापता था। काफी पतासाजी के बाद भी जब उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, तो रामेश्वर ने पत्नी ममता के साथ भाटापारा ग्रामीण थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस भी अपने स्तर पर काफी प्रयास कि लेकिन युवराज का कुछ पता ना चला। धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और पूरा डहरिया परिवार सदमे में डूब गया।

मां अपने लाडले को एक नजर देखने को तरसती, पत्नी अपने सुहाग की सुरक्षा की दुआएं मांगती। पिता सीने पर पत्थर रख सभी को ढांढत बंधाते कि एक ना एक दिन बेटे का पता चल जाएगा। उनका दिल कहता है कि उसके साथ कोई अनहोनी नहीं हुई होगी। उनकी दलील सभी को हिम्मत दे जाती और उम्मीदें जिंदा रही।

फेसबुक बना जरिया

टीआई भाटापारा नरेश चौहान ने बताया कि परिजनों के मुताबिक युवराज दिमागी रूप से थोड़ा कमजोर है। वह बांग्लादेश के कुरिग्राम जेल में बंद था। वहां उसके साथ बांग्लादेश का ही युवक दीप शाह भी कैद था।

दीप हिंदी जानता था। यहीं दोनों के बीच मित्रता हो गई। युवराज ने उसे अपने निवास का पता बताया। दीप जेल से जब रिहा हुआ तो उसने युवराज की तस्वीर के साथ फेसबुक पर पोस्ट डाला, जिसमें लिखा- जब तुम अपना घर (छत्तीसगढ़, बलौदाबाजार, इंडिया) वापस चले जाओगे तो मैं सबसे हैप्पी आदमी बनूंगा। जिसका कोई नहीं, उसका भगवान होता है। इसी दौरान फेसबुक के जरिए दीप का संपर्क बलौदाबाजार के शालिनी शुक्ला से हुआ। शालिनी के जरिए सूचना पुलिस तक पहुंची। प्रशासन ने बीते अगस्त माह से युवराज को बांग्लादेश से वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

जुबां थी बंद, आंसू बोल रहे थे

दो नवंबर को जिला प्रशासन की टीम युवराज को लाने रवाना हुई। बांग्लादेश सीमा पर कोलकाता के चांगलाबांधा में बीएसएफ और स्थानीय पुलिस की मदद से युवराज को बलौदाबाजार की टीम के सुपुर्द किया गया। शुक्रवार को प्रशासन और पुलिस की टीम युवराज को लेकर उसके घर पहुंची और परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस दौरान परिवार के लोगों की जुबां बंद थी और झर-झर बहते आंसू बोल रहे थे।

Posted By: Sandeep Chourey