भरूवाडीह। जिला मुख्यालय बलौदाबाजार से 22 किलोमीटर दूर विकासखण्ड सिमगा के अंतर्गत ग्राम पंचायत रावन है। अंग्रेजों के विरुद्घ आजादी के लिए लड़ाई में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने वाले 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से गौरवान्वित होने के कारण ही इस गांव को गौरव ग्राम रावन के नाम से जाना जाता है। यहां के 11 सेनानियों की स्मृति में हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण शासकीय सेनानी उधातर माध्यमिक विद्यालय किया गया है। लेकिन विडंबना है कि सेनानियों की स्मृति में यहां स्मारक स्तंभ बनाया गया जिसका अस्तित्व अब समाप्ति की ओर है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां के इस सेनानी स्कूल में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए स्काउट गाइड, एनसीसी और रेडक्रास, जैसे रचनात्मक कार्ययोजनाएं संचालित होते रहे हैं, जो कि विगत लगभग 12 वर्षों से स्कूल में बंद चुके हैं। किन्तु इन्हें यहां के जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के चलते भुला दिया गया है या कहें कि इसकी देखरेख करने की बजाय इसके रखरखाव को दरकिनार कर दिया गया है, जिसके अभाव में यहां सेनानी स्तम्भ की स्थिति बद से बदत्तर हो गयी है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्या यही हमारा फर्ज और कर्तव्य है कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे आने वाले सुखद भविष्य के लिए बढ़चढ़ कर हिस्सा लेकर गांव को गौरवान्वित करने वाले हमारे सम्मानीय सेनानियों के स्मृति में निर्मित स्तंभ के रखरखाव की ओर तनिक ध्यान भी न दें। जागरूक ग्रामवासियों ने बताया कि गौरव ग्राम पंचायत रावन के शासकीय सेनानी उधातर माध्यमिक विद्यालय प्रांगण मंच के समीप सेनानी स्तंभ (स्मारक) तत्कालीन सरपंच शिव करसायल के कार्यकाल में निर्मित किया गया था, जिसका लोकार्पण 14 अगस्त 2003 में जिला सहकारी बैंक रावन में बचत बैंक के लोकार्पण में पधारे तत्कालीन खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर के अध्यक्ष मोहम्मद अकबर के मुख्य आतिथ्य और तत्कालीन विधायक गणेश शंकर बाजपेयी की अध्यक्षता में हुआ था। लेकिन अब रख रखाव पर विगत कई वर्षों से ध्यान नहीं दिए जाने के कारण सेनानी स्तंभ का अस्तित्व समाप्त की ओर है। सेनानियों के योगदान से इस गांव को गौरव ग्राम का सम्मान मिला है, आने वाले पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के मान-सम्मान के लिए प्रोत्साहित कर गौरव ग्राम के प्रति विद्यार्थीयों को जागरूक करना चाहिए, लेकिन सेनानी के स्तंभ की दुर्दशा देखकर जिम्मेदार स्वच्छता के प्रति कितने गंभीर हैं, यह स्पष्ट दिखाई पड़ता है।

जबकि सर्वसाधारण को ज्ञात है कि देश में आजादी के 75 वें वर्ष को सभी लोग अमृत महोत्सव के रूप में मनाने प्रफुल्लित और उत्साहित हैं। बावजूद सेनानी स्तंभ की पहचान लुप्त हो जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रामीणों ने शासन व जिला प्रशासन से इस संबंध में विशेष ध्यान देकर सेनानियों के सम्मान में पुनरुद्घार का कार्य कराने की मांग की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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