दल्लीराजहरा (नईदुनिया न्यूज)। आयरन ओर नगरी जिसे धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है परन्तु पिछले कुछ माह से जब से लाकडाउन का असर राजहरा शहर में हुआ तब से दल्लीराजहरा के सभी 27 वार्डों में जुआ-सट्टा का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। प्रत्येक वार्ड में सत्ता पक्ष के प्रभावशाली कुछ लोगों के समर्थक अवैध सट्टे का कारोबार पुलिस के नाक के नीचे चला रहे हैं। अवैध सट्टे के खेल से कई परिवार बर्बाद हो गए हैं। स्थानीय पुलिस को जब शिकायत की जाती है तो थाना प्रभारी द्वारा शिकायतकर्ताओं से ही पूछा जाता है कि कौन से वार्ड में कौन-कौन सट्टा एवं जुआ का काम कर रहा है बताएं, तो हम कार्रवाई करेंगे। जब शिकायतकर्ता पुलिस को नामजद शिकायत करते हैं तो पुलिस शिकायतकर्ता का नाम अवैध कारोबारियों, जुआ-सट्टा चलाने वाले को बता देती है और आपस में लड़वा देते हैं। इस तरह का माहौल शहर का बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार वार्ड क्रमांक एक से लेकर 27 तक ऐसा कोई भी वार्ड नहीं है जहां अवैध जुआ-सट्टा, शराब का कारोबार न होता हो। बड़ा आश्चर्य का विषय है कि यह प्रभावशाली लोग ही अवैध कारोबार करते हैं और जब पुलिसिया कार्रवाई होती है तो यहीं सत्ता पक्ष के लोग कार्रवाई करने से मना करते हैं। सत्ता पक्ष के प्रभावशाली लोगों का प्रभाव कानून में इतना है कि वे अपने प्रभाव से अवैध कार्य कराने लगे हैं और शासन प्रशासन भी नतमस्तक होकर प्रभावशाली लोगों का कार्य कर रहे हैं।

कुछ जानकार सूत्रों ने बताया कि कुछ सटोरिए जो पहले जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे थे वे अब जनप्रतिनिधि के रूप में चुनकर नहीं आए तो सट्टे का कारोबार करने लगे हैं। मतलब पांचों ऊंगली घी में सिर कढ़ाई में। जब जनप्रतिनिधि तो जनता का सेवा करें, और न हो तो सट्टे का कारोबार करें, इस तरह का हाल है राजहरा शहर का। राजहरा पुलिस के संरक्षण में ही राजहरा शहर में जुआ-सट्टा एवं अवैध शराब का खुलेआम कारोबार चल रहा है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू एवं डीजीपी डीएम अवस्थी के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन राजहरा शहर में हो रहा है। राजहरा थाना क्षेत्रान्तर्गत पुलिस कर्मियों को किसी भी तरह का भय नहीं है। वे तो अवैध कार्यों को अंजाम देने में लगे हुए हैं, जबकि यही राजहरा शहर में जब जिला पुलिस क्राइम टीम आती है तो बड़ी संख्या में जुआ-सट्टा का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है। अब प्रश्न यह उठता है कि जब जिला पुलिस क्राइम टीम कार्रवाई कर सकती है तो राजहरा पुलिस थाना अवैध कारोबारियों के खिलाफ क्यों कार्रवाई करने से पीछे हटते हैं।

पुलिस कार्रवाई नहीं होने से शहर में नए खाईवालों की इंट्री

राजहरा शहर में सट्टे का कारोबार परवान चढ़ रहा है, जिसके चलते सट्टा खाईवाल की तादात बढ़ती जा रही है। युवा पीढ़ी सट्टा बाजार में खाईवाल द्वारा दिखाए जाने वाले रंगीन सपनों के जाल में फंसते जा रहे हैं। पुलिस की सुस्ती से नगर में सट्टे का खेल अब गली-गली में चल रहा है। इसके बावजूद पुलिस के कानों तक इसकी आवाज नहीं पहुंच रही है। रातों रात अमीर बनने के चक्कर में युवा से लेकर बूढ़े इस कारोबार में फंसकर अपनी कीमती कमाई गंवा रहे हैं। नगर के युवा 1 से लेकर 99 नंबर लगाते हैं। सट्टा लगाने वाले व्यक्ति को एक नंबर बताना होता है। अगर उसकी ओर से लगाया गया नंबर सटीक बैठता है तो उसे एक रुपये के 80 रुपये मिलते हैं। दस रुपये का 800 रुपये और 100 रुपये का नंबर लगाने पर 8000 रुपये मिलते हैं। 80 गुना रकम ज्यादा पाने के चक्कर में युवा से लेकर बूढ़े तक सट्टे का नंबर लगाने के दीवाने बने फिरते हैं। यहां तक कि कुछ महिलाएं भी नंबर लगाने में पीछे नहीं हैं। शहर में कुछ महिला खाईवाल भी हैं, जो युवाओं को अमीर बनने का लालच देकर सट्टे के दल-दल में धकेल रही हैं।

गलियों को बनाने लगे अड्डा

खाईवाल सरेआम सट्टा लगवा रहे हैं। उन्होंने अपना पैंतरा बदल लिया है। अब वह गली-मोहल्ले में ठिकाना बनाकर सट्टे का काला कारोबार कर रहे हैं। इस काले कारोबार में अमीर बनने के चाह में नौजवान उजड़ रहे हैं और खाईवाल मालामाल होते जा रहे हैं।

कोड वर्ड में चलता है धंधा

सट्टा कोड वर्ड का अवैध करोबार है। मसलन कोई युवा 22 नंबर लगाता है तो वह खाईवाल से जाकर कोड वर्ड में बता देगा। कोडवर्ड में काम होने से आसपास बैठे व्यक्ति को इसकी भनक तक नहीं लगती है। मालूम पड़ा है कि एक से लेकर 99 तक नंबरों के कोड वर्ड रखे गए हैं। एक नंबर खाना लगाने वाले का होता है बाकी के खाने खाईवाल के पास होते हैं। नंबर बताने की प्रक्रिया भी बेहद गोपनीय होती है।

वर्जन

अवैध कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है।

टीएस पट्टावी, थाना प्रभारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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