दल्लीराजहरा (नईदुनिया न्यूज)। इस बार शरद पूर्णिमा कई दुर्लभ संयोगों एवं महत्वपूर्ण योग के साथ आ रही है। इस वर्ष शुक्रवार प्रदोष काल में निशा काल ( मध्य रात्रि) में पूर्ण पूणिर्मा तिथि व्याप्त होने से शरद पूर्णिमा का पर्व होगा। शनिवार को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि है पर पर्व शुक्रवार को होगा।

पं प्रेम शुक्ला ने बताया कि इस बार शरद पूर्णिमा के योग में महालक्ष्मी जी का पूजन वैभवता का योग है। शुक्रवार को ही राजराजेश्वरी महालक्ष्मी जी का व इंद्र देव की पूजा करके रात्रि जागरण किया जाता है। इसे ही कोजागरी व्रत कहा जाता है। जो लोग स्थिर लक्ष्मी व सुख समृद्घि वैभव की कामना करते हैं उन्हें शरद पूर्णिमा को महालक्ष्मी जी का पूजन व इंद्र देव की पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त क्रिया से करना चाहिए। सभी मनोकामनाएं को पूर्ण करने के लिए प्रदोष काल में पूजा करें। रात भर जागरण करें, पूजा पाठ अभिषेक अर्चना आरती करें। लक्ष्मी जी रात्रि में पृथ्वी पर भ्रमण करती है, जो जागरण करता है उसे स्थिर लक्ष्मी, सुख समृद्घि सौभाग्य संतान सुख का आशीर्वाद देती है। जब पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल में निशा काल ( मध्य रात्रि) में आश्विन मास की पूर्णिमा में हो तो कोजागरी व्रत होता है। सिर्फ पूर्णिमा निशिथव्यापनि मध्य रात्रि में ही हो तो शरद पूर्णिमा व्रत दूसरे दिन प्रदोष काल मे होगी। इसे ही शरद पूर्णिमा भी कहते हैं।

पं प्रेम शुक्ला ने बताया कि रूके धन से, ऋण से, भूमि भवन उलझन से जो परेशान हैं व नूतन भूमि भवन लाभ के लिए, उद्योग व्यापार प्रगति के रोग निवारण के लिए सभी को शरद पूर्णिमा पर राजराजेश्वरी भगवती महालक्ष्मी का अनुष्ठान करना चहिए। निश्चित आपके कार्य सिद्घ होंगे इसमे कोई संशय नहीं है। मंदिर में, देवालयों में, तीर्थ स्थलो में, पवित्र नदी के तटों पर गोशाला घी या तिल तेल के 108 या 1100 दीपक लगाएं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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