बालोद। सोमवार को कलेक्टर जनमेजय महोबे ने कृषि, जिला विपणन संघ एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में जिले में उर्वरक व्यवस्था के संबंध समीक्षा करते हुए कंपनी एवं राज्य स्तर से उर्वरकों की उपलब्धता की जानकारी ली। बैठक में ब्लाक स्तर पर उपलब्ध उर्वरकों को जल्द समितियों में भंडारण कर समिति स्तर पर कृषकों को वितरण कराने के निर्देश दिये गये। जिन समितियों में उर्वरक की कमी है, उनमें प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक भंडारण करने के लिए नोडल अधिकारी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक को समिति प्रबंधकों के माध्यम से आरओ, डीडी जारी करने कहा गया है।

कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि सामान्यतः कृषकों द्वारा डीएपी उर्वरकों की मांग अधिक की जा रही है। जिसकी उपलब्धता के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। कलेक्टर ने शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार उर्वरकों की गुणवत्ता नियंत्रण, विक्रय के लिए पीएओएस मशीन की अनिवार्यता एवं निर्धारित दर पर उर्वरकों का विक्रय करने के निर्देशित किया गया है।

उन्होंने बताया कि कृषि उत्पादन में हाइयील्डिंग, प्रमाणित एवं हायब्रिड बीजों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकांश अधिक उपज देने वाली किस्मों की पोषक तत्व ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है। अतः कृषकों द्वारा अधिक उपज प्राप्त करने की दृष्टि से उपयोग के साथ उर्वरकों की खपत में वृद्घि हुई है। मानसून के आगमन 155.90 मिमि वर्षा के साथ धान, दलहन एवं अन्य फसलों की फसल की बुआई की जा रही हैं। जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषकों द्वारा रसायनिक उर्वरकों की पूर्ति सहकारी एवं लायसेंसी निजी विक्रेताओं द्वारा की जाती हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में पौधों के पोषक तत्वों के पूर्ति हेतु यूरिया, सुपर फास्फेट, डाइअमोनियम फास्फेट (डीएपी), म्यूरेट आफ पोटास, इफको, एनपीके उर्वरकों की उपलब्धता जिले में हो रही है। उर्वरक औद्योगिक रुप से निर्मित रसायन है, जिसके पोषक तत्वों की उपलब्धता पौधों को शीघ्र होती है। कृषक शीघ्र प्रभाव देने वाली, अधिक पोषक तत्व की मात्रा वाली उर्वरक डीएपी का उपयोग करना अधिक पसंद करते हैं। इसमें 18 प्रतिशत नाइट्रोजन एवं 46 प्रतिशत स्फुर (फास्फोरस) है।

वर्तमान में शासन द्वारा डीएपी उर्वरक की कम उपलब्धता को देखते हुए पौधों के पोषक तत्व फास्फोरस की पूर्ति के लिए सुपर फास्फेट का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सहकारी एवं निजी क्षेत्र में उर्वरकों के मूल्य नियंत्रण करने के लिए उर्वरक नियंत्रण आदेश के अनुसार शासन द्वारा जारी गजट में निर्धारित अधिकतम मूल्य से अधिक कीमत पर कोई भी विक्रेता, निर्माता विक्रय नहीं कर सकता है। सहकारी एवं निजी लायसेंसी विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों में उर्वरकों का मूल्य एक समान है।

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