बालोद। शनिवार को बालोद वनमंडल क्षेत्र में दो दंतैल हाथी अभी मौजूद है। एक ग्राम नर्रा में घूम रहा है तो दूसरा हाथी धानापुरी क्षेत्र में है। जिसके चलते ग्रामीण डरे हुए है। इधर, राजनांदगांव से चंदा हाथियों का दल जिले के मानपुर क्षेत्र में दाखिल होने की जानकारी मिल रही है। नर्रा में बीती रात को नौ बजे के करीब दंतैल हाथी ग्रामीण संतोष मंडावी के घर के बरामदे तक पहुंच गया था। वहीं, बाड़ी में लगे मूंग की फसल को भी हाथी ने रौंद दिया। गांव में जैसे ही हाथी के पहुंचने की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो वे जान बचाने के लिए छत पर चढ़ गए।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद वनरक्षक गांव पहुंचे और मशाल आदि के जरिए अपनी जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों की जान बचाने के लिए हाथी को भगाने में डटे रहे। करीब आधे से एक घंटे की मशक्कत के बाद हाथी को वहां से हटाकर जंगल की ओर भेजा गया। इस दौरान वनरक्षक मनोज साहू, हेमचन्द ध्रुव, सचिन कुलदीप की भूमिका रही। जिन्होंने बहादुरी का काम किया। उन्होंने सूझबूझ से काम लेते हुए हाथी को घर से निकालने में सफलता पाई। तब जाकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। रात भर वनरक्षक गांव की सीमा पर पहरा देते रहे ताकि हाथी दोबारा बस्ती की ओर दाखिल ना हो जाए।

हाथियों से दूरी बनाने अलर्ट जारी

नर्रा में जो हाथी घूम रहा है यह वही है जिसने मुल्ले में एक किसान की जान ले ली थी। यह हाथी उग्र स्वभाव का है। तो वहीं नई बात यह भी सामने आई है कि इस हाथी को वन विभाग पहले वही शांत हाथी समझ रहे थे। जो तालगांव के नर्सरी में आकर विचरण करता था। लेकिन बीती रात को जब प्रत्यक्ष वन कर्मचारियों ने हाथी को करीब से देखा और उनके पांव के निशान देखे तो पुष्टि हो गई कि यह तो वह हाथी नहीं था।

इसका आकार भी बड़ा था और यह हिंसक प्रवृत्ति का भी लग रहा था। जिसके बाद वन विभाग ने लोगों को सचेत किया है कि इस हाथी के करीब जाने से बचे। तालगांव में जो हाथी आता था वह हिंसक स्वभाव का नहीं था। लेकिन यह खतरनाक है। इससे छेड़खानी से बचने के लिए ग्रामीणों को आगाह किया जा रहा है। ताकि मुल्ले में जो घटना हुई ऐसी घटना दोबारा ना हो सके।

Posted By: Nai Dunia News Network

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