बालोद (नईदुनिया न्यूज)। कलेक्टर जनमेजय महोबे ने कहा कि मौजूदा खरीफ सीजन में जिले के किसानों को किसी भी स्थिति में खाद-बीज की कमी की समस्या से जुझना ना पड़े, इसके लिए समय पूर्व सभी उपाय सुनिश्चित किए जाए। उन्होंने जिले में उर्वरक व्यवस्था के संबंध में कृषि, जिला विपणन संघ एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक गुरुवार को संयुक्त जिला कार्यालय के कलेक्टर कक्ष में ली। उन्होंने कृषि एवं संबद्घ विभाग के अधिकारियों को जिले के किसानों को समुचित मात्रा में खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।

बैठक में कंपनी एवं राज्य स्तर से उर्वरकों की उपलब्धता की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने डबल लॉक स्तर उपलब्ध उर्वरकों को यथाशीघ्र समितियों में भंडारण करके समिति स्तर से कृषकों को वितरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जिन समितियों में उर्वरक की कमी है, उनमें प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक भंडारण करने के लिए नोडल अधिकारी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को समिति प्रबंधकों के माध्यम से आरओ, डीडी जारी करने के लिए सख्त निर्देश दिए।

डीएपी उर्वरकों की मांग अधिक

कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि सामान्यतः कृषकों द्वारा डीएपी उर्वरकों की मांग अधिक की जा रही है, जिसकी उपलब्धता के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। डीएपी की विकल्प के रुप में सुपर फास्फेट जिसमें सामान्यतः 16 प्रतिशत स्फूर (फारफोरस) एवं 11 प्रतिशत गंधक होता है। इसके उपयोग करने के लिए संबंधित अधिकारियों को कृषकों के मध्य तकनीकी प्रचार-प्रसार करने के लिए समझाइश दी गई। उन्होंने बताया कि शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार उर्वरकों की गुणवत्ता नियंत्रण, विक्रय के लिए पीएओएस मशीन की अनिवार्यता एवं निर्धारित दर पर उर्वरकों के विक्रय सुनिश्चित करने संबंध में समीक्षा भी की गई।

उप संचालक ने बताया कि जिले के कृषि विकास में हाईयील्डिंग, प्रमाणित एवं हायब्रिड बीजों के कृषकों द्वारा उपयोग के साथ उर्वरकों की खपत में वृद्घि हुई है। मानसून के आगमन के साथ धान, दलहन एवं अन्य फसलों की फसल की बुआई प्रारंभ हो चुकी है, जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषकों द्वारा रसायनिक उर्वरकों की पूर्ति सहकारी एवं लायसेंसी निजी विक्रेताओं द्वारा की जाती है। उन्होंने बताया कि खरीफ वर्ष 2022-23 में सहकारिता 37500 मीट्रिक टन, निजी 23400 मीट्रिक टन कुल 60900 मीट्रिकटन का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्घ सहकारिता क्षेत्र में 29043 मीट्रिक टन का भंडारण एवं भण्डारण के विरुद्घ 22941 मीट्रिकटन का वितरण हो चुका है तथा वर्तमान 6102 मीट्रिकटन उर्वरक सहकारी समितियों में उपलब्ध है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 8027 मीट्रिकटन का भण्डारण एवं भण्डारण के विरुद्घ 4306 मीट्रिक टन (53.64 प्रतिशत) का वितरण किया गया है।

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