बालोद (नईदुनिया न्यूज)। जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत जुंगेरा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से तालाब गहरीकरण के बाद अवैध मुरुम खनन का मामला सामने आया है। दरअसल लाकडाउन और कोरोना महामारी के दौर में ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार और जल भराव के नाम पर नरेगा के तहत नौ लाख रुपये की लागत से जुंगेरा के माता तालाब का गहरीकरण किया गया। लेकिन गहरीकरण के ठीक बाद तालाब में अवैध खनन कर बड़ी मात्रा में मुरुम परिवहन को अंजाम दिया गया है।

आलम यह है कि खनन माफियाओं द्वारा आर्थिक हितों के फेर में तालाबों को बिना खनिज विभाग की अनुमति और पंचायत प्रस्ताव के बेतरतीब ढंग से खोदकर बर्बाद कर दिया गया है। बताना होगा कि अवैध मुरूम खनन में कुछ जनप्रतिनिधि के अलावा सफेदपोश नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। जहां संबंधितों द्वारा जेसीबी मशीन से बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया। ग्रामीण बताते हैं कि लगातार यहां 10 से 15 दिनों तक एक जेसीबी मशीन से मुरुम खोदकर सैंकड़ों ट्रिप मुरुम गांव से बाहर परिवहन कर शासन को लाखों का चूना लगाया गया। खनिज का बेतहाशा दोहन किया गया है। तालाब से कितना मुरूम निकला है, पंचायत प्रतिनिधि भी नहीं बता पा रहे हैं। ग्राम पंचायत जुंगेरा के सचिव नरेंद्र भारद्वाज का कहना कि इस मामले में सरपंच ही अच्छे से बता पाएंगे। इस मामले में सरपंच से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल नबंर बंद था।

अधिकारियों की निष्क्रियता हो रही उजागर

खनिज विभाग के अधिकारियों के निष्क्रियता के परिणाम स्वरूप खनन माफियाओं के हौसले बुलंद है। जिले में जुंगेरा सहित कई गांव में तालाब खनन कर सैकड़ों ट्रक अवैध मुरुम परिवहन को अंजाम दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार मुरुम के अवैध खनन में शासकीय कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और सफेदपोश नेताओं की संलिप्तता देखी जा रही है।

उठने लगी है जांच की मांग

तालाब से निकलने वाली मिट्टी और मुरुम को गांव में ही उपयोग करने के निर्देश हैं, लेकिन खनन माफियाओं की मिलीभगत से तालाब से निकले मुरुम का उपयोग गांव से बाहर किया गया। इसके लिए खनिज विभाग से कोई परमिशन नहीं ली और विभागीय अधिकारी ने भी इस तरफ कोई ध्यान दिया। अब मनरेगा से गहरीकरण हो जाने के तुरंत बावजूद गहरीकरण की आड़ में अवैध मुरुम खनन और परिवहन की जांच कराने की मांग उठने लगी है।

ऐसे होता है खेल

जिस ग्राम पंचायत में अवैध खनन करना होता है, वहां पर माइनिंग माफिया जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से ऐसे स्थान का चयन करते हैं, जहां पर मनरेगा से काम हुआ हो। इसके बाद उस पर कुछ दिन तक जेसीबी मशीन लगाकर मुरूम खोद कर स्टाक बनाया जाता है। अगर आपत्ति होती है तो उसे ओवर बर्डन मुरूम बताकर रायल्टी के लिए खनिज विभाग में आवेदन कर देते हैं। लेकिन जुंगेरा के माता तालाब में ग्रामीणों को झांसे में रखकर लाखो रुपए की सैकड़ो ट्रीप मुरुम का परिवहन किया जा चुका है।

जमीन को कर रहे हैं बर्बाद

जिले में अवैध खनन का आलम यह है कि खनन माफियाओं द्वारा कहीं पर भी शासकीय भूमि को खोद दिया जा रहा है, वहीं तालाबों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। गौरतलब हो कि अल्प वर्षा व भीषण गर्मी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर तालाब सूख चुके हैं, ऐसी स्थिति में गांव के सूख चुके तालाबों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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