दल्लीराजहरा। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र विकासखंड डौंडी के आदिवासी किसानों को फेरी करने वाले खाद विक्रेता नकली खाद देकर लूटने का कार्य कर रहे हैं। इस तरह की जानकारी डौंडी ब्लाक के पीड़ित किसान विनोद कुमार श्याम ने दी है। किसान विनोद ने बताया कि पिछले दिनों मोटरसाइकिल में खाद विक्रेता आया था और जिनसे हमने खाद खरीदी थी। इस खाद डालने के बाद फसल चौपट हो चुकी है। अब पीड़ित किसान डौंडी थाना की शरण में जाने की तैयारी में है।

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र विकासखंड डौंडी के विभिन्ना ग्रामों में नकली खाद बेचने वाला गिरोह लगातार घूम रहा है। गत वर्ष दल्ली राजहरा के श्रमवीर चौक के समीप नकली एवं डुप्लीकेट खाद विक्रय करने वाले के खिलाफ में कृषि विभाग एवं राजहरा पुलिस ने कार्रवाई की थी। अब फिर से नकली खाद विक्रेता सक्रिय हो गए हैं। डौडी ब्लॉक में धान फसल की बेहतर उत्पादकता को देखते हुए यहां खाद का भी बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। खाद की बढ़ती मांग को देखकर यहां कुछ ऐसी भी कंपनियां आ जाती हैं, जो नकली खाद तैयार कर किसानों को भी विक्रय कर देती हैं। डीएपी के नाम पर नकली खाद बेचने वाली एक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किसान डौंडी थाना पहुंचने लगे हैं।

ज्ञात हो कि डीएपी की कीमत प्रति बोरी 12 सौ रुपये है। किल्लत का लाभ उठाकर बाजार में इसे अधिक कीमत पर बेचा जा रहा था। यही नहीं कुछ किसानों ने तो ज्यादा दाम देकर इसे खरीद भी लिया। किसानों के बीच खाद की किल्लत को देखते हुए श्वाइल कंडीशनर को बायो डीएपी के नाम से बेचा जा रहा था। डीएपी खाद नहीं मिलने पर किसान इसे ही डीएपी खाद की जगह प्रयोग कर रहे थे। इसकी कीमत डीएपी से कुछ कम थी। वहीं जिले में खाद विक्रेताओं द्वारा सरकारी मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचा जा रहा है। दुकानों में कोई भी रेट लिस्ट नहीं लगाई गई है। इसके चलते किसानों को खाद के उचित मूल्य का पता नहीं चल पाता और दुकानदार किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। अगर कृषि विभाग इन दुकानों में मूल्य लिस्ट लगाने के निर्देश दे तो किसानों को उचित मूल्य पर दवाइयां एवं खाद मिल सकती है।

एक तरफ जहां सहकारी समिति कम दामों में खाद बेचने की योजना बनाती है तो वहीं खुले बाजार में उनसे लगभग 200 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं। डीएपी की अगर हम बात करें तो इसका बाजार मूल्य 1250 रुपये प्रति बोरी निर्धारित है। वर्तमान में यह 1650 रुपये में प्रति बोरी बिक रही है। इसी तरह यूरिया 300 रुपये प्रति बोरी यूरिया 550 रुपये, पोटाश 600 रुपये प्रति बोरी की जगह 850 रुपये प्रति बोरी बिक रही है। व्यापारियों द्वारा अवैध वसूली से किसान परेशान हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। कुछ संगठनों ने कलेक्ट्रेट में आवेदन भी दिया पर आज तक कोई कार्रवई नहीं हो पाई है। इस पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

किसानों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

डौंडी ब्लाक के ग्राम कुसुमकसा धोबनी अ, धोबनी ब, भर्रीटोला 43, रजही, चिपरा, ध्रुवाटोला, सुवरबोड़, दानीटोला, भैंसबोड़, गुजरा, खल्लारी, पुसावड़, कुंजकन्हार, आमाडूला, चिहरो, मंगलतराई, बेलौदा, सिंघोला, मथेना, ढोर्रीठेमा, भर्रीटोला 36, सुरडोंगर, लिमऊडीह, मरदेल, गुदुम, मरकाटोला, बम्हनी, छिंदगांव, अवारी, कांड़े, कुंआगोंदी, ठेमाबुर्जुग, पेण्ड्री, पटेली, पचेड़ा, घोठिया, बोरगांव, कामता, सह्लाईटोला, कोटागांव, नलकसा, कुमुडकट्टा, आड़ेझर, खैरवाही, नर्राटोला, चिखली, साह्ले, सिंघनवाही, टेकाढोड़ा, चिखलाकसा, धोबेदण्ड, बिटाल, अरमुरकसा सहित अंचल के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उद्यानिकी विभाग की कई योजनाएं शासन द्वारा चलाई जाती है, परंतु विधानसभा क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में ग्रामीण उद्यानिकी विस्तार अधिकारी निकोसे ने कहा कि सभी किसानों को शासन की योजनाओं का लाभ दिया जाता है। शासन स्तर पर ही योजनाएं नहीं आ रही है, इस कारण किसानों को लाभ पहुंचाने में विलंब हो रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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