बालोद (नईदुनिया न्यूज)। जिले में क्रेडा विभाग द्वारा किसानो को बिना बिजली बिल वाली सौर ऊर्जा संचालित सोलर पंप किसानों ने लगवा तो लिए लेकिन वह अब पानी नहीं दे रहे हैं। खेतो में बंद पड़े सोलर पंप की मरम्मत के लिए क्रेडा विभाग के अधिकारियो को किसानो द्वारा कई बार सूचित करने के बाद भी ध्यान नही दिया जा रहा है न की कंपंनी वाले लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सोलर पंप की पांच वर्ष की गारंटी होने बाद भी किसानों की शिकायत पर उसकी वैधता की जांच नहीं कराई गई है। जिससे किसानों ने सोलर पंप के पेयरों की गुणवत्ता खराब होने का आरोप लगाते हुए सोलर पंप के लिए जमा किया गया अंशदान वापस कराए जाने की मांग की है। क्रेडा विभाग द्वारा योजना के तहत जिले में तीन हॉर्स पावर के सोलर पंप लगाए गए हैं। जो किसानों के खेतों की सिचाई नहीं कर पा रही है ग्राम हथौद के किसान कौंसल कुमार साहू ने अपनी पीड़ा नईदुनिया से व्यक्त करते हुए बताया की ग्राम खेरथा में मेरा जमीन है जिसमे क्रेडा विभाग द्वारा सौर ऊर्जा संचालित सोलर पंप लगाया था जिसमे मुझे एक सोलर पंप पर तकरीबन 20 हजार रुपये लागत आया था सौर ऊर्जा संचालित सोलर पंप एक दो माह चलने के बाद बंद हो गया जिसकी जानकारी मेरे द्वारा क्रेडा विभाग को कई बार जानकारी देने के बाद भी इधर कोई ध्यान नही दिया गया जिसके चलते मेरा समय भी खराब हुआ और पैसा भी बर्बाद हुआ है= बिना बिजली बिल जमा किए खेतों की सिचाई का सपना देखने वाले किसान अब सोलर पंप न चलने के कारण खून के आंसू रो रहे हैं। वही ग्राम हथौद निवासी जनक लाल साहू ने बताया की उसे सोलर पंप लगाते समय सिचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने का आश्वासन दिया गया था साथ ही पंखा और लाइट जलाने के लिए ऊर्जा प्राप्त होगी। यह भी जानकारी दी गई थी। यदि सारे दिन में सोलर पंप से एक बीघा खेत की भी सिचाई नहीं हो रही है। खराब क्वालिटी के पेयर लगा दिए गए हैं। जिसे बदलवाने की मांग की है। खेत में लगाया गया सोलर पंप पानी नहीं दे रहा है। जिससे खेतों की सिचाई पंपसेट से करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

अनुबंध शर्तों के अनुसार निर्माता फर्म की जिम्मेदारी

संयंत्रकी पांच साल की वारंटी तथा इसके बाद पांच साल के लिए सर्विस। सूचीबद्घ निर्माता द्वारा कृषक के खेत पर स्थापित सोलर पंप की फेसिंग एवं बीमा कराना। फॉल्ट की सूचना मिलने के तीन दिन में कार्रवाई करना। सोलर पंप में किसान के द्वारा केयर सेंटर उद्यान विभाग कार्यालय में कंपनी की गड़बड़ी की शिकायत होने पर एक सप्ताह में जांच करानी होती है। जबकि किसान उद्यान विभाग कंपनी को एक साल से शिकायत कर रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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