बालोद। ग्राम परसतराई के युवा और बुजुर्गों ने मिलकर एक अनोखा पहल किया है और कहा भी जाता है कि जब युवा अपने युवा शक्ति के साथ और बुजुर्गों अपने जीवन के अनुभव के साथ मिलकर कोई कार्य करे तो असंभव से भी असंभव कार्य संभव हो जाता है इसी के तर्ज ग्रामीणों ने मिलकर विगत वर्षों से ईट के ढेर पर उगे हुए 15 फीट के चारी पीपल के पेड़ को वहां से जड़ सहित हटाकर एक सुरक्षित स्थान तालाब के किनारे पर रोपित किया गया। युवाकांत सिन्हा स्वयंसेवक पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्घि हो रही है। इसका एकमात्र कारण पेड़-पौधों की कटाई है। यदि समय रहते पेड़-पौधों का संरक्षण नहीं किया गया तो संतुलन बिगड़ जाएगा। इसका प्रभाव पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक प्राणी पर पड़ेगा। पर्यावरण को बचाने का एकमात्र उपाय अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाना व संरक्षित करना बेहद जरूरी है। जब भी अवसर मिले हमें एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता कौशल गजेंद्र ने बताया की पीपल के वृक्ष को तालाब के पार पर लगभग पांच फीट गड्ढा खोदकर इसको रोपित किया है।

पौधारोपण करने के साथ-साथ उनका संरक्षण करना अनिवार्य है। बिना संरक्षण के अधिकांश पौधे लगाने के कुछ दिन बाद ही सूख जाते हैं। पौधों की पेड़ बनने तक देखभाल करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। इससे के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। वृक्षारोपण करने में महत्वपूर्ण योगदान वरिष्ठ नागरिक हीरा लाल सिन्हा, उपसरपंच तीजू सिन्हा, रमेश, कौशल गजेंद्र ,युवाकांत सिन्हा यशराज गजेंद्र, ग्राम पंचायत परसतराई विशेष सहयोग रहा।

खिलौनों के जरिए बच्चों की पढ़ाई को बनाया जाएगा आसान

एनटीसीएफ के तत्वावधान में शिक्षकों के नवाचार के प्रोत्साहन करने के लिए शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें 'पेडागाजी' अर्थात खिलौने आधारित शिक्षण से बच्चों के गुणवत्ता स्तर को बढ़ाने में किस प्रकार सहायक है। एनईपी 2020 में टायपेडगाजी को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसी विषय पर जिला एवं अन्य जिलों से वर्चुअल जुड़े अतिथि शिक्षकों ने बधाों के अभिव्यक्ति कौशल में खिलौने की भूमिका व महत्व पर चर्चा की। पाठ्यक्रम का अध्ययन अध्यापन में खिलौने आधारित शिक्षा को कैसे? किस रूप में देखते हैं और पढ़ाते वक्त खिलौने का क्या महत्व है? कैसे शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर को हम खिलौने के माध्यम से बढ़ा सकते हैं? उनके इस तर्क में भाषाई कौशल ,वैज्ञानिक अवधारणा का विकास कर सकते हैं। मुख्य अतिथि अनुराग त्रिवेदी डीएमसी, विशिष्ट अतिथि जीएल खुरश्याम एपीसी, रागनी अवस्थी एपीसी रायपुर व अध्यक्षता अरुण साहू अध्यक्ष एनटीएफसी व कार्यक्रम प्रभारी कैशरीन बैग ने की। कार्यक्रम में चित्रमाला राठी, लोकेश्वरी कश्यप सिंगापुर, मोनू गुप्ताऋषि प्रधान आदि शामिल थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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