बालोद। बालोद स्थिति दूध गंगा पिछले कुछ दिनों से केवल दूध दही और घी का ही काउंटर बना हुआ है। यहां पर मिठाईयां पूरी तरह से गायब है। वही काउंटर में ख़ड़े सेल्समैन का व्यवहार भी कई बार लोगों को नागवार गुजरता है। सामान मांगने पर अधिकतर समय मोबाइल पर ही बिजी रहता है। बालोद में संचालित गंगा मईया दुग्ध उत्पादक एवं प्रसंस्करण सहकारी समिति द्वारा संचालित दूध गंगा संस्थान का गठन बालोद जिला में काफी पूर्व से किया गया है।

कई बार विवादों के बाद भी यह संस्था अच्छे से संचालित है, लेकिन इन दिनों यह संस्था अपने उद्देश्य पर पूरी तरह खरी नहीं उतर रही है। शुरुआत के दिनों में दूधगंगा काफी दूर-दूर तक चर्चित थी। यहां पर सभी प्रकार की मिठाइयां उचित दामों में और शुद्घ रूप से मिलने के कारण लोग यहां से खरीदारी करते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां पर मिठाई लेने आने वाले लोग बैरंग लौट रहे हैं। काउंटर में सिर्फ दूध दही लस्सी घी आदि ही मिल रहा है।

शादी के चलते मिस्त्री छुट्टी पर

बताया जाता है कि यहां पर तैनात मुख्य मिस्त्री शादी की वजह से कुछ दिनों से नहीं आ रहा है। वही छेना के काम करने वाले मिस्त्री भी पिछले 13 दिन से छुट्टी पर है। यही वजह है कि कोई भी मिस्त्री नहीं होने के कारण इन दिनों मिठाई नहीं बन पा रही है।

दूध, दही, लस्सी की बढ़ी खपत

गर्मी की वजह से यहां पर लस्सी की खपत काफी ब़ढ़ गई है। यहीं वजह है कि मिठाई बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले दूध जो मिठाई नहीं बनने के कारण बच रहा है उसे दही और लस्सी बनाने में उपयोग किया जा रहा है। गर्मी होने की वजह से लोग इसकी मांग ज्यादा कर रहे हैं। दूध के यहां खप जाने से समिति को कोई विशेष नुकसान नहीं हो रहा है।

दूसरी ओर शादी सीजन होने के कारण मिठाइयों की मांग भी काफी ब़ढ़ गई है लेकिन दूध गंगा में मिठाई नहीं होने से लोग परेशान हो रहे हैं। लोग पहले मिठाई खरीदने दूधगंगा में ही आते हैं, लेकिन फिलहाल लोगों को मायूस होना पड़ रहा है। ग्राहकों ने बताया कि काउंटर पर ख़ड़े रहने वाले कर्मचारी मोबाइल पर ही बिजी रहते है दो से तीन बार पुकारना पड़ता है।

सूची 41 सामानों की, पर मिल रही कुछ ही

यहां पर जो सामग्री की सूची लगाई गई है उसमें कुल 41 सामानों के मिलने का विवरण है। पहले हर हमेशा सारे सामान यहां मिलते भी थे लेकिन धीरे-धीरे अब इसमें कटौती हो रही है। हालत यह है कि अभी कुछ दिनों से किसी भी प्रकार की मिठाइयां यहां नहीं मिल रही है। इसको लेकर भी शहर में चर्चा है। बता दें कि शुरुआती दिनों में इस समिति के काम से सारे लोग खुश थे और सभी प्रकार की मिठाइयां यहां मिलने के कारण लोग राहत भी महसूस करते थे।लोगों को लगता था कि दूधगंगा जाने के बाद उन्हें वापस नहीं लौटना पड़ेगा लेकिन अब स्थिति यह है कि मिठाई वालों को मायूस होकर यहां से लौटना पड़ रहा है।

मुख्य मिस्त्री के कुछ दिनों से नहीं आने के कारण मिठाईयां नहीं बन पा रही है। एक मिस्त्री 13 दिन से नहीं आ रहा है। आज से हमारी दुकान में पूरी मिठाइयां बननी चालू हो जाएगी।

- ललित हरदेव, वरिष्ठ प्रबंधक दूध गंगा बालोद

Posted By: Nai Dunia News Network

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