स्वाधीन जैन-बालोद। राम नाम का अलख जगाने और सुबह की हवा लाखों की दवा के उद्देश्य को लेकर ग्राम पैरी में बीते सात साल से हर रोज सुबह प्रभात फेरी निकाली जा रही है।

इसमें दर्जनों ग्रामीण राम नाम की धुन के साथ पूरे गांव में भ्रमण करते हैं। बारिश हो या ठंड हो या गर्मी हो किसी भी मौसम में आज तक प्रभात फेरी नहीं थमीं। खास बात यह है कि गांव के गुड़ी पड़वा से निकलने वाली प्रभात फेरी में शुरू में तो आसपास के लोग रहते हैं, लेकिन जैसे-जैसे यह आगे बढ़ती जाती है ग्रामीण अपने घरों से निकलकर इसमें शामिल होते जाते हैं।

सैनिक ग्राम पैरी में मार्च 2014 से आज तक हर रोज सुबह चार बजे प्रभात फेरी निकाली जा रही है। राम धुन गाते हुए गाजे-बाजे के साथ प्रभात फेरी पूरे गांव का भ्रमण करती है। इस प्रभात फेरी का उद्देश्य जीवन से मुक्ति के लिए हरि कीर्तन व स्वस्थ रहने के लिए सुबह की हवा लाख रुपये की दवा के उद्देश्य को लेकर ग्रामीण आज तक इस क्रम से जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस प्रभात फेरी की प्रेरणा स्रोत महंत भरतमुनि उदासीन है, जो इसी गांव के रहने वाले हैं। 17 साल की उम्र में वे हरियाणा के एक आश्रम में रहते हैं। 2014 में यहां पर भरत मुनि का प्रवचन हुआ।

इस प्रवचन से ही यहां प्रभात फेरी की शुरुआत हुई, जो आज तक चल रही है। इस प्रभात फेरी में 35 से 40 लोग हर रोज शामिल होते हैं। इनमें से कुछ लोग तो नियमित रूप से रहते हैं वही अलग-अलग गलियों में गुजरने पर उस गली में रहने वाले लोग एक-एक कर इसमें शामिल होते जाते हैं। खास बात यह है कि इस रैली का समापन पुनः ग्राम भ्रमण कर इसी गुड़ी पड़वा में ही होती है। प्रभात फेरी का अंतिम पड़ाव गांव के देवी देवताओं का मंदिर होता है। कभी शीतला मंदिर तो कभी बजरंगबली का मंदिर तो कभी शंकर भगवान के मंदिर तक रैली जाती है।

एक माह तक 24 घंटे चला षोडश मंत्र का जाप

ग्रामीण व रैली में शामिल मूलचंद ने बताया कि 2018 में पुनः भारत मुनि द्वारा पुरुषोत्तम मास में एक माह का पुरुषोत्तम कथा पर प्रवचन हुआ। इस दौरान पूरे एक माह तक चौबीसों घंटे यहां पर षोडशी मंत्र, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे का जाप चलता रहा। मूलचंद ने बताया कि महंत भरत मुनि उदासीन ग्राम पैरी के निवासी हैं 1989 में उन्होंने संन्यास धारण किया और तब से वे हरियाणा के आश्रम में रहते हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा में अनेक बार इनका प्रवचन हो चुका है, लेकिन छत्तीसगढ़ में 2014 में उन्होंने प्रथम प्रवचन दिया था।

प्रभात फेरी में महिलाएं भी होती हैं शामिल

रोज सुबह निकलने वाली प्रभात फेरी में पुरुषों के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल होती हैं। यही नहीं कई बच्चे भी हर रोज इस प्रभात फेरी में शामिल होते हैं। महिलाएं अपने घरों के सामने भजन कीर्तन करते हुए रैली के आने का इंतजार करती हैं और जैसे ही रैली उसके घर आंगन के द्वार पर पहुंचती है भजन गाते हुए यह महिलाएं भी आगे तक रैली में शामिल हो जाती हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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