दल्लीराजहरा (नईदुनिया न्यूज)। दल्लीराजहरा, डौंडी, चिखलाकसा, कुसुमकसा अंचल के कुछ किसान धान कटाई के बाद खेत में ही थ्रेसर से मिंजाई कर पराली (पैरा) को खेत में ही जला रहे हैं। इससे पर्यावरण दूषित हो रहा है। किसान रबी फसल लेने की जल्दबाजी में ऐसा करते हैं। राजस्व व कृषि विभाग पर जिन पर इसे रोकने की जिम्मेदारी है वे भी इस ओर उदासीन हैं। अब तक अंचल में ऐसे किसानों पर कार्रवाई नहीं की गयी है, जिसके कारण किसानों में कोई भय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने खेत में पैरा व धान कटाई के बाद बचे हुए ठूंठ को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। बावजूद किसान खेतों में आग लगा रहे हैं। ऐसा करने पर किसानों पर कार्रवाई करने का भी प्रावधान है।

आग लगाने से खेतों के सूक्ष्म तत्व हो रहे नष्ट

किसान धान कटाई के बाद उसे खलिहान तक पहुंचाते हैं और व्यवस्थित तरीके से मिंजाई कर पैरा को भी व्यवस्थित रखते हैं। इसके बाद पशुओं को पूरे वर्षभर खिलाते हैं, लेकिन अब कई किसान धान कटाई कर खेतों में ही थ्रेसर से मिंजाई कर रहे हैं और पैरा भी खेतों में जला रहे हैं। खेतों में आग लगाने पर जमीन पर पाये जाने वाले सूक्ष्म तत्व भी जलकर नष्ट हो जाते हैं। इससे आगामी वर्ष में फसल की उत्पादन पर भी असर पड़ता है, लेकिन किसान जानकारी के अभाव में यह कदम उठाते हैं।

किसान धान कटाई के साथ मना रहे बढ़होना पर्व

अंचल में धान कटाई के साथ-साथ बढ़होना पर्व किसान मना रहे हैं। बढ़होना पर्व में धान कटाई के बाद खेत के एक कोना में धान की फसल को छोड़ते हैं और उस फसल का पांच मुट्ठी काट कर करपा रखकर हसिया को करपा में रखकर किसान पूजा अचर्ना करते हैं। मुर्रा, चना, खीर, पुड़ी, नारियल चढ़ाते हैं। फिर सभी मजदूर पूजा अर्चना कर किसान के माथे पर तिलक लगाकर आर्शीवाद लेते हैं। वहीं मजदूरों को बढ़होना के समय किसान बढ़होना भी देते हैं। यह परंपरा पूर्वजों द्वारा ग्रामीण अंचल में चलते आ रहा है। पूजा पाठ होने के पश्चात किसान अपने खेतों में पटाखा भी फोड़ते हैं जिससे आसपास के किसानों को पता चलता है कि आज किस किसान का बढ़होना हो रहा है।

क्या है बढ़होना पर्व

जैसे धान की बोआई से पहले पूजा-पाठ करते हैं, वैसे ही धान की कटाई के अंतिम समय में भी पूजा-पाठ करते हैं। इसे ही बढ़होना कहा जाता है। इस दौरान जितने भी काम करने वाले मजदूर जाते हैं उसे मुर्रा, लाई और नारियल का प्रसाद बांटा जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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