हरिवंश देशमुख। मालीघोरी। छत्तीसगढ़ वैसे तो अपने पारंपरिक वेशभूषा व तीज त्योहार के नाम से जाना पहचाना जाता है, जहां किसान अपनी पुरानी परंपरा देवी देवता की पूजा अर्चना के अनुसार समय-समय पर गांव में तीज त्यौहार व धान की मिजाई, कटाई के बाद मंडई मेला का आयोजन किया जाता है और अपने परिजनों व जानने वाले को निमंत्रण देखकर खुशियां मनाते हैं।

आपको बता दें कि मालीघोरी मंडाई के दिन 12 गांव के बरगहिन कहे जाने वाले आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर का द्वार विशेष रूप से महिलाओं के लिए साल में एक बार मंडाई के ही दिन व गांव में तीन साल में बोए जाने वाली जोत जवारा विसर्जन (अष्टमी) के दिन ही खोला जाता है, जिसका महिलाओं को बेसब्री से इंतजार रहता है।

इस दिन माता बहने सुबह से नित्य कर्म करके पूजा की थाली सजा कर माता के दर्शन के लिए लंबी लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार करती हैं, मंडाई के दिन विशेष छूट रहती है बाकी समय पूर्णता वर्जित रहती है। लेकिन इस बार कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए मंडई स्थगित की गई है। साथ ही मां दंतेश्वरी मंदिर के दर्शन शारीरिक दूरी का पालन करते हुए किया जाएगा।

वहीं गांव के बईगा शिवप्रसाद व ग्रामीण राजकुमार प्रभाकर ,गंगाराम देशमुख, स्वरूप धनकर, मेड़सिंह देशमुख, देवनाथ देशमुख, अमरू राम उर्वसा आदि लोगों ने बताया कि पुरानी मान्यता अनुसार जमीदार रजवाड़ा के जमाने से यह परंपरा चली आ रही है, जिसमें आसपास के गांव के लोग अपने-अपने गांव से डांग डोरी व मंडई सजाकर लाते हैं और मालीघोरी की मड़ाई एक साथ पारंपरिक तरीके से मनाते हैं। आज भी यह परंपरा कायम है, पर इस साल जिला प्रशासन के निर्देशानुसार मंडाई को रद किया गया है।

मनोकामनाएं होती है पूर्ण

गांव की पंच देव व बैगा के द्वारा पूजा अर्चना की जाएगी मिली जानकारी के अनुसार सन 1963 में खरखरा नहर नाली का निर्माण किया जा रहा था तब वहां से भिलाई स्टील प्लांट को पानी देने के लिए खरखारा खरखरा नाहर नाली का निर्माण किया गया जो मालीघोरी (दुधली) होकर गुजरती है, पर नाली निर्माण के रास्ते में मंदिर आ रही थी, जिसे इंजीनियर द्वारा गांव वालों को तोडने कहा गया और मंदिर को दूसरी जगह बनाने कहा गया तो गांव वाले नहीं माने और उसे बहुत समझाने का प्रयास भी किया गया पर इंजीनियर अपनी हठधर्मिता पर अड़ा रहा और खुद कुदारी उठा कर मंदिर तोडने लग गए तब उनके ऊपर कुछ घटना घटी तब दूसरे इंजीनियर व शासन को गांव वालों ने समझा-बुझाकर मंदिर के किनारे से नाली निर्माण कराया गया, आज भी मान्यता है कि कोई श्रद्घालु मां के दरबार में सच्चे मन से जोड़ा नारियल बांधते, या घोड़ा चढाते हैं तो उनकी मनोकामना सफल होती है।

सरपंच ने दी मंडई स्थगित होने की दी जानकारी

दुधली के सरपंच मो फिरोज तिगाला ने सभी व्यापारियों से निवेदन किया है की कोई भी व्यापारी इस साल दुकान ना लगाएं क्योंकि जिला प्रशासन के निर्देशानुसार दुधली मंडाई को रद किया गया है, वहीं राजकुमार प्रभाकर जनपद सदस्य डौंडीलोहारा जानकारी देते हुए बताया कि देवी मंडई होने के कारण गांव के बैगा व पंच देव के द्वारा माता की पूजा अर्चना की जाएगी महिलाओं के लिए मां के दर्शन के लिए द्वार खोला जाएगा जिसमें कोरोना गाइडलाइन के नियमों का पालन किया जाएगा सभी माता बहने बारी-बारी से दर्शन कर सकती हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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