बालोद। शहर में अवैध प्लाटिंग पर अंकुश लगाने के लिए नगर पालिका की ओर से जगह को चिन्हांकित कर नोटिस दिया गया है। इसके बाद भी कालोनाइजर प्लाट को टुकड़े-टुकड़े में बेच दिए हैं। अवैध प्लाट की पुख्ता जानकारी नगर पालिका के पास मौजूद नहीं है। इसी का फायदा उठाकर कालोनाइजर प्लाट को टुकड़े में बेच रहे हैं। वहीं प्लाट खरीदने वाले लोगों को भटकना पड़ रहा है। बालोद शहर के अलावा आसपास के गांव में अवैध प्लांटिंग का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। एक जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने बालोद शहर में करीब 17 जगह पर अवैध प्लाटिंग के रूप में चिन्हांकित किया है। इनमें से भूमि स्वामियों को पालिका प्रशासन ने नोटिस जारी कर संबंधित प्लाट का दस्तावेज भी प्रस्तुत करने के लिए कहा था। जबकि पूर्व में ही कई अवैध कालोनियां बसाई जा चुकी है।

राज्य सरकार के निर्देश पर इनमें से दो कालोनियों की नियमितीकरण की प्रक्रिया चल रही है। उधर शासन के स्पष्ट निर्देश के बाद शहर के नगरीय निकाय क्षेत्रों में अवैध प्लांटिंग का कारोबार रूकने का नाम नहीं ले रहा है। गौरतलब है कि पूर्व में जिला प्रशासन के निर्देश पर पालिका प्रशासन ने अवैध प्लाटिंग को चिन्हांकित कर वहां बनाए गए सड़को पर बुलडोजर चलाया था। इसके बाद भी अधिकांश कालोनाइजरों ने प्लाट को टुकड़े-टुकड़े में काटकर लोगों को बेच दिया है। जबकि नियमानुसार अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ सबूत जुटाकर पालिका प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई किया जाना था। ऐसे में कालोनाइजरों के साथ सांठगांठ से इंकार नहीं किया जा सकता।

सूत्रों की मानें तो चिंहांकित किए गए अवैध प्लाटिंग की जमीनों को दलालों ने 15 सौ रूपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से बेच दिया है। अब प्लाट की खरीदी करने वाले लोग रजिस्ट्री कराने के लिए भटक रहे हैं। उधर सूत्रों की मानें तो पालिका प्रशासन के पास शहर में कितनी अवैध प्लाटिंग हुई है, इसकी भी पुख्ता जानकारी नहीं है। इंजीनियरों ने अवैध प्लाटिंग के सर्वे के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है। शायद यही वजह है किन-किन स्थानों पर अवैध प्लाटिंग हुआ है, उसका नक्शा, खसरा, बी-1 समेत अन्य दस्वावेजों की भी उन्हें जानकारी नहीं है। इस संबंध में उधााधिकारियों से जानकारी लेने पर वे भी कुछ कहने से कतरा रहे हैं। ऐसे में पालिका की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगा है।

रेरा पंजीयन को रखा ताक पर

नियमानुसार कालोनाइजरों को कालोनियों का निर्माण समेत प्लाटिंग करने के पूर्व रेरा में पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। विभिन्न बिंदुओं पर जांच-पड़ताल करने के बाद भी कालोनोइजरों को पंजीकृत किया जाता है। बालोद जिले में किसी भी कालोनाइजरों ने रेरा से पंजीयन ही नहीं कराया है। ऐसे में नियमों को ताक में रखकर कालोनाइजर मनमानी कर रहे है।

कार्रवाई को लेकर अफसर भी मौन

अवैध प्लाटिंग करने वाले कालोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों ने भी मौन साध लिया है। बताया गया है कि नगर निवेश समेत अनुविभागीय अधिकारी भी कार्रवाई के लिए पालिका प्रशासन का मुंह ताक रहे हैं। शायद यही वजह है कि अवैध प्लाटिंग के लिए बनाए गए सड़को को खोदने के अलावा अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है।

इन जगहों पर हुई अवैध प्लाटिंग

पड़ताल में पता चला है कि गंजपारा, पांडेपारा, कुंदरूपारा, पाररास, रेलवे कालोनी, सिवनी, झलमला, बघमरा, पाररास पड़कीभाट बाईपास आदि में अवैध प्लाटिंग जारी है।

सोमवार को आफिस टाइम में आ जाइए। वही फोन लगा लीजिएगा। - प्रतीक दीक्षित, सहायक संचालक, नगर निवेश बालोद

Posted By: Nai Dunia News Network

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