दल्लीराजहरा (नईदुनिया न्यूज)। कोरोना वायरस के चलते देश भर में लॉकडाउन किया गया है तथा लोगों को घरों में ही रहने की हिदायत दी गई है ताकि संक्रमण न फैल सके। ऐसी स्थिति में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धान की फसल कटाई के लिए उन्हें मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। कभी तेज धूप तो कभी बारशि होने के कारण फसल पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को चौतरफा मार पड़ने लगा है।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन जारी है। शासन-प्रशासन द्वारा कोरोना महामारी से बचाव संबंधी जानकारी देने के बाद भी कुछ ग्रामीण सावधानी नहीं बरत रहे हैं। वहीं कई गांव में कोरोना वायरस को लेकर लोग काफी गंभीर हैं जहां ग्रामीण गांव के अपने सीमावर्ती क्षेत्रों को पूर्णता बंद कर दिए हैं जिसके कारण एक गांव से दूसरे गांव के लोग भी आवाजाही नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण लॉकडाउन का पूरा पालन कर रहे हैं। गांव के सामुदायिक भवन, स्कूल भवन में दूसरे प्रदेशों से जो काम कर लौटे हैं ऐसे पलायन से लौटे मजदूरों को गांव के बाहर रखकर उन्हें सामाजिक दूरी का पालन करा रहे हैं। ऐसे लोगों को घर से भोजन लेकर बाहर ही दिया जा रहा है ताकि एक सप्ताह तक ग्रामीणों की निगरानी में रह सकें। वहीं कई गांवों में लॉकडाउन का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे लोगों को पुलिस लगातार समझा रही है लेकिन न समझने वालों को खदेड़ रही है ताकि लॉकडाउन का पालन कराया जा सके। पुलिस के समझाने के बावजूद कुछ लोग बेवजह घूम रहे हैं जबकि अधिकतर लोग इससे बचाव के लिए प्रयास कर रहे हैं। नगर व गांव में राशन दुकानों में चावल का वितरण भी किया जा रहा है जिसमें शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा है ताकि एक स्थल पर भीड़ एकत्रित न हो सके।

मजदूर कामों में जाने से कतरा रहे

कोरोना वायरस के चलते रबी फसल एवं सब्जी जो तैयार हो गए हैं उसकी भी कटाई नहीं हो पा रही है। गांव में मजदूर भी ऐसे कामों में जाने में कतरा रहे हैं। खेतों में धान की फसल तैयार है लेकिन मजदूर धान कटाई के लिए नहीं जा रहे हैं। जिन किसानों ने धान की फसल ली है उनके परिवार से जुड़े ही लोग धान की कटाई कर रहे हैं। इस कोरोना वायरस के चलते गांव में भी दहशत का माहौल बना हुआ है। इसी प्रकार कुछ गांवों के किसान केला एवं पपीता की खेती कर रहे हैं उन्हें भी पपीता तोड़ने के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहा है जबकि सैकड़ों पपीता पककर तैयार है। हालांकि ऐसे किसान अपने परिवार के साथ पपीता को तोड़कर कई क्विंटल पपीता बाजार में ले जाकर बेच रहे हैं। ऐसी स्थिति में कुछ लागत वापस आने की संभावना बन रही है। सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी मजदूर नहीं मिल रहे हैं। अपने परिवारों के साथ सब्जी तोड़कर स्थानीय बाजार में सब्जी बेच रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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