बालोद। ग्राम पंचायत झलमला में शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्जे को हटाने की मांग को लेकर बालोद युवा कांग्रेस ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। युवा कांग्रेस के शहर अध्यक्ष साजन पटेल ने बताया कि ग्राम झलमला में खसरा क्रमांक 1233/1 रकबा 0.48 हेक्टेयर लगभग डेढ़ एकड़ सरकारी भूमि पर कब्जा करके प्रसन्ना वाटिका बना कर आधिपत्य कर लिया गया है।

युवा कांग्रेस की शिकायत के आधार पर जांच में जमीन पर बालोद के एक व्यक्ति का कब्जा और 3600 वर्ग फिट में पक्का निर्माण भी पाया है। पंचनामा व सीमांकन की भी कार्यवाही हो चुकी है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर झलमला में अवैध कब्जा करने वाले पर कार्रवाई कर जमीन को खाली कराने की मांग की गई है। युवा कांग्रेस के नेताओं ने 10 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि जमीन को खाली नहीं कराया गया तो आमरण अनशन और उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। बड़े पैमाने में काबिज शासकीय जमीन पर किए गए अतिक्रमण के विरुद्घ फिलहाल अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

शासन की कीमती जमीन पर आज भी अतिक्रमण

जानकारी के मुताबिक ग्राम झलमला शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 1233/1 में स्थित 0.4800 हेक्टर भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। शासकीय रिकार्ड में यह जमीन घास मद में दर्ज है। अवैध कब्जे की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने मामले की जांच की है। जांच में शिकायत को सही पाया गया है। पटवारी की मौका रिपोर्ट के बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया है। राजस्व अमले की लापरवाही की वजह से शासन की कीमती जमीन पर आज भी अतिक्रमण है।

दबंगों के खिलाफ नही होती कोई कार्रवाई

सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण पर गहरी चिंता जताते हुए युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रशासन में बैठे लोगों को ग्राम झलमला के जनता की भविष्य की कोई परवाह नही हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जिला के प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बनकर बैठे हैं। एक ओर प्रशासन के द्वारा जो गरीब 10 फीट भूमि पर कब्जा कर अपना घर बनाए हैं उनको नोटिस दिया जाता है, लेकिन कई एकड़ पर कब्जा करने वाले दबंगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

पहले बेदखली नही तो सजा का है प्रविधान

भू-राजस्व अधिनियम की धारा के मुताबिक यदि पटवारी की मौका रिपोर्ट के आधार पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है तो पहली बार में अतिक्रमी के खिलाफ नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई की जाती है। यदि तीसरी बार अतिक्रमण करने की पुष्टि होती है तो अतिक्रमी को सजा हो सकती है। इस मामले में तहसीलदार और नायब तहसीलदार को यह अधिकार है।

जरूरत प्रशासन के सख्त कार्रवाई की

सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ राजस्व विभाग के द्वारा न तो कड़ी कार्रवाई की जाती है न तो नियमों की पालना में सख्ती के अभाव के चलते राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। सरकारी जमीन पर कोई अतिक्रमण करता है तो उसके खिलाफ महज कागजी कार्रवाई होती है, जबकि जरूरत प्रशासन के सख्त कार्रवाई की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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