बलरामपुर(नईदुनिया न्यूज)। छोटी-छोटी कोशिशों से ही बड़े कायोर् की शुरुआत होती है। किसान मसीदास किस्पोट्टा की कहानी भी उक्त वाक्य से मिलती है। मसीदास जैसे लोग बिरले ही मिलते हैं जो जिंदगी में हुए बदलाव को स्वीकार कर सफलता की नई इबारत लिखते हैं। विकासखण्ड बलरामपुर के ग्राम पुटसुरा निवासी मसीदास किस्पोट्टा 2004 में नक्सली गतिविधियों में शामिल था। शासन की पहल पर उसने आत्मसमर्पण कर जिंदगी की नई शुरूआत की। आत्मसमर्पण के पश्चात उसने कृषि कार्य को अपना पेशा बनाया तथा धान, मक्के एवं सब्जी की एक साथ खेती कर इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल की तकनीक में बाड़ी का उपयोग एक ही स्थान पर धान उत्पादन, मछली पालन एवं मेढ़ों में सब्जी का उत्पादन करने में होता है। जिससे आवश्यकता के अनुरूप पौष्टिक साग-सब्जियां बाड़ी से ही प्राप्त हो जाती हैं मसीदास किस्पोट्टा सहित जिले में 75 किसानों की बाड़ी में कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजना अंतर्गत इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया है।

मसीदास की बाड़ी के लगभग 20 डिसमिल क्षेत्र में मैदानी कर्मचारियों की देखरेख एवं तकनीकी मार्गदर्शन में समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल तैयार किया गया। मसीदास ने समन्वित कृषि प्रणाली के बताया कि घर के निकट होने से बाड़ी की अच्छे से देखरेख हो जाती है। एक ही स्थान से धान, मछली एवं सब्जी का उत्पादन होने से काम आसान हो गया है एवं कम लागत में ही अच्छी आय मिल रही है। माडल की विशेष बात यह है कि इससे किसान परिवारों की सब्जी की आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है साथ ही अतिरिक्त सब्जियां बाजार में भी बेच पा रहे हैं। मसीदास बताते हैं कि बरबट्टी एवं करेले के अच्छे दाम मिलने से अब तक लगभग आठ हजार की आय हो चुकी है। धान एवं मछली का उत्पादन भी अच्छा है।

समन्वित कृषि प्रणाली एक कारगर तकनीक है तथा इसका फायदा किसानों को देखने को मिल रहा हैं। इस प्रणाली से एक ही स्थान पर मछली, सब्जी एवं धान के उत्पान से लगभग 25 से 30 हजार की आमदनी प्राप्त हो सकती है। आने वाले समय में इसका विस्तार करने की योजना है।

अजय अनंत

उप संचालक कृषि

Posted By: Nai Dunia News Network

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