हेमंत कश्यप

जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इस साल का स्वतंत्रता दिवस चांदामेटा के रहवासियों के लिए यादगार और ऐतिहासिक रहा। आजादी के बाद यहां पहली बार ध्वजारोहण किया गया। इतना ही नहीं, प्रभातफेरी भी निकाली गई, जिसमें बच्चे, बुजुर्ग, युवा सभी ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। दरअसल, यह इलाका करीब तीन दशक से नक्सलियों के कब्जे में था। उनकी दहशत के चलते यहां अब तक काले झंडे ही फहराए जाते थे। फोर्स की दखल बढ़ने और कई मुठभेड़ों में नक्सली लीडरों के मारे जाने के बाद यह इलाका अब नक्सलियों से मुक्त हो गया है। इसके चलते यहां के ग्रामीणों ने खुली हवा में अपने झंडे को नमन किया है।

जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 77 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर पांच आश्रित बसाहट वाले ग्राम चांदामेटा में अब अमन और शांति है। छत्तीसगढ़ की दूसरी सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी तुलसी डोंगरी (3,914 फीट) की तराई में यह गांव बसा है।

पहुंचविहीन इस गांव में नक्सली दहशत के चलते कभी ध्वजारोहण नहीं किया गया। वर्ष 2006 में जब यहां प्राथमिक शाला प्रारंभ हुई और पदस्थ शिक्षक ने स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का प्रयास किया तो नक्सलियों ने उन्हें बहुत पीटा था। तब से चांदामेटा में काला झंडा ही फहरता रहा। 2012 से यह स्कूल बंद है। इसे समीप के गांव कोलेंंग में स्थानांतरित कर दिया है। इसे अब फिर से चांदामेटा में शुरू करने की तैयारी चल रही है।

आज यहां पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त कैंप खुल गया है। अब यहां के ग्रामीण भयमुक्त होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं। स्वतंत्रता दिवस पर हुआ आयोजन इसका उदाहरण है। चांदामेटा के अलावा भी दक्षिण-मध्य बस्तर के दो दर्जन से अधिक और भी ऐसे गांव हैं, जहां वर्षों बाद इस साल ध्वजारोहण किया गया।

वर्षा भी नहीं रोक पाई उत्साह

आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस पर सोमवार सुबह भारी वर्षा के बीच ग्रामीणों ने तिरंगा लेकर प्रभातफेरी निकाली। गांव के तिराहे पर बांस गाड़कर हिंदुस्तान जिंदाबाद का नारा बुलंद करते हुए बस्ती के वयोवृद्ध आयता और मुड़ा ने सौ से ज्यादा ग्रामीणों की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया।

इस अवसर पर ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाने के लिए डीएसपी भारसिंह मंडावी, सीआरपीएफ के सिस्टेंट कमांडेंट राजू वाघ, दरभा थाना के टीआइ शिशुपाल सिन्हा, उपनिरीक्षक रविकुमार बैगा, खोमराज ठाकुर, छिंदगुर पंचायत के सरपंच बुदरू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिभा सेठिया आदि मौजूद थे।

200 से अधिक स्कूलों में वर्षों बाद ध्वजारोहण

नक्सल विरोधी अभियान सलवा जुडूूम शुरू होने के बाद दक्षिण-पश्चिम बस्तर के 200 से ज्यादा स्कूलों में 2005-2006 से ग्रामीण राष्ट्रीय पर्व नहीं मना पाते थे। लेकिन इस साल यहां स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया गया। इन बंद स्कूलों को दोबारा इसी साल जुलाई में शुरू किया गया है। पेद्दाजोजेर, कमकानार, पुसनार, पालनार, मल्लूर, कैका, गुंडापुर, गोरना, ताड़बल्ला, पिटे, तुंगाली, बाके ली, तालमेड्री आदि गांवों के स्कूलों में हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों के साथ ही ग्रामीण भी शामिल हुए।

Posted By: Pramod Sahu

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