फरसगांव (नईदुनिया न्यूज)। केशकाल विधायक संतराम नेताम को रामायण में कुंभकरण की भूमिका इतनी पसंद है कि वे बचपन से ही कुंभकरण का रोल रंगमंच में करते आए हैं। आज वे विधायक हैं और राजनीति में पारंगत भी लेकिन अभी भी वे कुंभकरण की भूमिका को ही पसंद करते हैंं। इसी किरदार को निभाने में वे भलाई भी समझते हैं, क्योंकि कुंभकरण ज्यादातर समय सोते हुए ही काटा करता था। कुंभकरण को नींद से उठाना आसान काम नहीं था। बताया जाता है कि उसकी नींद ऐसी थी मानों की छह माह तक वह सोया करता था।

विधायक संतराम नेताम ने कहा कि पिछले वर्ष भी उन्होंने विधानसभा के ग्राम विश्रामपुरी में कुंभकरण बन दशहरा में रामलीला का मंचन किया था। बचपन में अपने गांव में रामलीला के दौरान कुंभकर्ण का रोल किया करते थे।

अब बड़ेेडोंगर के ग्रामीणों के कहने पर फिर एक बार विजयादशमी में कुंभकरण की वेशभूषा में यहां पहुंचा हूं। आगे भी यदि अवसर मिला तो कुंभकरण की ही भूमिका में ही दिखाई दूंगा। विजयादशमी के दिन फरसगांव ब्लाक के ग्राम बड़ेडोंगर में रामलीला मंचन में विधायक संतराम नेताम कुंभकरण के किरदार में नजर आए। ग्रामीण अपने विधायक को अपने बीच इस भूमिका में देखकर हैरत में रहे।

संतराम नेताम अलग-अलग भूमिका के चलते क्षेत्र में चर्चा में बने रहते हैं। इससे पहले कभी खेतों में हल चलाते हुए तो कभी कार्यक्रमों में गाना गाते हुए विधायक नजर आए। रंगमंच पर जब कुंभकरण को मारा जाता है तो उसका मुखौटा हटाकर जनता को स्पष्ट किया जाता है कि यह पात्र उनके विधायक हैं। विधायक मंच से जनता को और आयोजन समिति को उन्हें इस आदाकरी के लिए अवसर देने और दशहरे की बधाई देते हैं।

Posted By: Pramod Sahu

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