बेमेतरा(नईदुनिया न्यूज)। राज्य सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों को राज्य शासन की महत्वाकांक्षी राजीव गांधी न्याय योजना के तहत 21 मई को देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर किसानों को पहली किस्त के रूप में राशि देने का निर्णय लिया गया है, जिसका किसानों ने स्वागत किया है तथा जिले के 126501 किसानों को इसका लाभ भी मिलेगा, जिनमें 107086 लघु किसान तथा 19415 बड़ेकिसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा। विदित हो कि जिले की 102 समितियों में किसानों द्वारा 5876608 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा गया था। राज्य शासन द्वारा किए गए वायदे केअनुरूप धान बेचने केउपरांत किसानों को समर्थन मूल्य की राशि का भुगतान तो कर दिया गया था, किंतु अंतर की राशि किस्तों में देने की बात कहीं गई थी, जिसकी शुरुआत 21 मई से होने जा रही है। इसे लेकर किसानों में खुशी की लहर इसलिए देखी जा रही है कि एक ओर जहां किसान अभी खरीफ फसल की तैयारी में लगे हुए हैं, ऐसे अवसर पर किसानों को दी जाने यह राशि किसान अपनी खरीफ फसल की तैयारी में जरूरतों को पूरी कर कर सकते हैं।

दलहन तिलहन तथा सोयाबीन उत्पादक किसान हुए निराश

हालांकि राज्य सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों केअतिरिक्त राज्य के उन किसानों को भी इस योजना में शामिल किए जाने का वादा किया था तथा इन किसानों का पंजीयन भी कराया गया था जो किसान धान के अतिरिक्त दलहन, तिलहन, सोयाबीन, अरहर, कोदो कुटकी खेती कर रहे हैं। उन किसानों को भी इस योजना केदायरे में लाने की बात कहकर इन किसानों का पंजीयन समितियों के माध्यम से कराया गया था। बेमेतरा जिले में लगभग 15,000 से भी ज्यादा किसानों द्वारा शासन के दिए गए दिशा-निर्देश के तहत पंजीयन भी कराया गया था, किंतु जब योजना के किस्त देने की घोषणा की बात की गई तो सिर्फ धान उत्पादक किसानों को इस योजना में शामिल किया गया है। अन्य फसलों के उत्पादक किसानों को भी यह उम्मीद थी कि धान उत्पादक किसानों के साथ-साथ उन्हें भी इस योजना में शामिल कर राज्य शासन द्वारा 10000 प्रति एकड़ की दर से राशि उन्हें दी जाएगी। हालांकि शासन के किए गए घोषणा में आने वाले दिनों में इन किसानों को भी इस योजना में शामिल करने की बात तो कही गई है, किंतु इन दिनों किसानों के सामने भी खरीफ फसल की तैयारी के लिए उन्हें पैसे की आवश्यकता होनी स्वाभाविक कही जा सकती है और समय पर पैसा मिलने पर ही किसान उसका समुचित उपयोग अपनी खरीफ फसल में कर सकते हैं। बहरहाल ऐसे किसान निराश है, जिन्होंने अपना पंजीयन तो समितियों में किया था किंतु फिलहाल उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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