बेमेतरा(नईदुनिया न्यूज)। प्राकृतिक राल एवं गोंद का संग्रहण, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर कृषि विज्ञान केंद्र ढोलिया (बेमेतरा) में इंदिरा

गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण सह प्रदर्शन का आयोजन आज किया गया। इसमें ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े हुए 30 किसानों ने अपनी सहभागिता दी। जिनमें गोठान झालम, महिला व स्व-सहायता समूह की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम के द्वौरान कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डा. जीपी आयम द्वारा गोंद उत्पादन की संभावनाओं, उपयोग तथा उसके प्रसंस्करण से आय में वृद्घि के तरीकों पर विस्तार पूर्वक समझाया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. प्रतिमा करियार व इंजी. पीएस. पीसालकर द्वारा प्रदेश में पाए जाने वाले प्रमुख गोंद एवं राल उत्पादन करने वाले वृक्षों की पहचान पर विस्तृत जानकारी दी तथा गोंद के खाद्य पदार्थ के रूप में, औषधि के रूप में कास्मेटिक के निर्माण में उपयोग पर भी जानकारी दी। साथ ही गोंद को निकालने की विधि तथा उसके उपयोग पर प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया गया। इंजी. पूजा साहू द्वारा

चरोटा, ग्वारफल्ली से गोंद उत्पादन पर चर्चा की गई। किसानों को गोंद निकालने की विधि पर प्रदर्शन के माध्यम से भी समझाया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक डा. प्रज्ञा पांडेय, डा. जीतेंद्र जोशी, डा. हेमंत साहू की सहभागिता व उपस्थिति रही।

क्षेत्र में लगातार दिया जा रहा है तकनीकी प्रशिक्षण

उल्लेखनीय है कि जिले में लगातार अधिकारियों द्वारा प्राकृतिक राल व गोंद संग्रहण, प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन पर किसानों को तकनीक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे पहले साजा स्थित कालेज में भी कई किसानों को इस तरह का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान शामिल हुए थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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