बेमेतरा(नईदुनिया न्यूज)। बहुप्रतीक्षित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का आगाज हुए तीन दिन हो गए हैं, किंतु अब उन किसानों के लिए एक तरह से परेशानी सामने आ रही है, जिनके धान का रकबा कम कर दिया गया है। शुरुआती दौर में गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने के समय राजस्व विभाग द्वारा रकबा में किसी तरह की कटौती नहीं करने की बात कहकर वास्तविक रूप से खेतों में ली जाने वाली फसलों की ही जानकारी एकत्रित करने की बात कही गई थी, किंतु अब किसान जब धान बेचने के लिए सोसाइटियों में पहुंच रहे हैं तो उन्हें गत वर्ष की तुलना में इस बार कम धान का पंजीयन होने की जानकारी दी जा रही है। राका निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य गौकरण साहू, सुरेश, नरसिंह, पोषण, अर्जुन यादव, अवध सहित लगभग 20 किसानों ने बताया कि उनके द्वारा फसल में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है और ना ही रकबे में ही को कमी हुई है, फिर पंजीयन में उनका रकबा कम दर्शाया जा रहा है। इस संबंध में पीड़ित किसानों ने एसडीएम बेरला से अपनी फरियाद की है। साथ ही वे लगातार राजस्व विभाग तथा खाद्य विभाग से लगातार संपर्क कर रहे हैं, किंतु उनके द्वारा किसानों को एनआइसी करने की सलाह दी जा रही है।

रकबे में कटौती की बात अकेले राका का ही नहीं है, बल्कि अंचल में अब कई किसान इस तरह की शिकायत लेकर लगातार एसडीएम तथा कलेक्टर से भी अपनी फरियाद लगा रहे हैं, किंतु इसे विडंबना ही कही जा सकती है कि आखिर जब खेतों के निरीक्षण करने के उपरांत राजस्व अमला द्वारा गिरदावरी रिपोर्ट भेजी गई है तो आखिर रकबे में कटौती कैसे हुई।

कहीं टेबल में बैठकर तो नहीं भर दी गई है जानकारी

जिस तरह से लगातार कई गांव के किसानों द्वारा रकबा कम कर दिए जाने की शिकायत लेकर कार्यालय पहुंच रहे हैं, जिसके चलते इतना अवश्य कहा जा सकता है कि यह किसी साफ्टवेयर का नहीं बल्कि टेबल में बैठकर बनाई गई रिपोर्ट का ही परिणाम है, जिसका दंश झेलने के लिए किसान मजबूर हो गए हैं। वास्तव में यदि फिल्ड में जाकर रिपोर्ट बनाई होती तो शायद इस तरह के हालात नहीं होते, वहीं राजस्व विभाग से जुड़े हुए कुछ लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यह भी बताया कि भुइयां साफ्टवेयर में डायरेक्ट लिंक कर दिए जाने के चलते साफ्टवेयर में कमियों के चलते इस तरह के हालात बने हैं।

रिकार्ड दुरूस्त करने का किया जा रहा प्रयासः कलेक्टर

कलेक्टर शिव अनंत तायल से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि लगातार इस तरह की शिकायत लेकर किसान कार्यालय पहुंच रहे हैं। रिकॉर्ड दुरुस्त कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि किसानों को परेशानी ना होने पाए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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