किशोर तिवारी-बेमेतरा(नईदुनिया न्यूज)। किसानों की आय में वृद्घि हो सके तथा किसानों के पैदा किए हुए धान के दाने-दाने की कीमत लोग समझ सके। यह परिकल्पना सन्‌ 2008 में ही भूपेश बघेल तथा स्थानीय स्तर पर उनके सहयोगी अविनाश तिवारी द्वारा ग्राम राका में आयोजित नवरात्रि के कार्यक्रम में किया गया था। ग्रामीणों से चर्चा के उपरांत उक्त चर्चा को मूर्त रूप देने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा बकायदा 2008 में प्रस्ताव भी पारित कर एथेनाल फैक्ट्री की जमीन सुरक्षित रख ली गई है। मजे की बात तो यह है उक्त जमीन पर आवागमन के साधन के साथ-साथ पानी की समुचित व्यवस्था भी कर ली गई है, ताकि फैक्ट्री में पानी की समस्या ना हो। साथ ही साथ फैक्ट्री से निकलने वेस्ट मटेरियल की भी समुचित व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया गया है। हालांकि वर्तमान में केंद्र सरकार के द्वारा एथेनाल बनाने की मंजूरी दे दी गई है तथा प्रति लीटर इसकी खरीदी की दर भी निर्धारित कर दी गई है, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि एथेनाल धान तथा गन्ने की फसल से तैयार की जानी है, जिसके चलते किसान इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि अब उनके द्वारा पैदा किए गए धान का समुचित उपयोग हो पाएगा तथा उन्हें बेहतर मूल्य भी मिल पाएगा जो कि निश्चित रूप से अंचल के किसानों के आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का एक अहम कदम माना जा सकता है

कृषि प्रधान जिला बेमेतरा के लिए एथेनॉल बनाए जाना एक वरदान साबित होगा

केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा लगातार किसानों के हितेषी होने की बात कही जाती रही है। अब जिले के किसानों के लिए एथेनाल बनाने की फैक्ट्री जिले में स्थापित करने में भी राज्य सरकार सफल होती है तो निश्चित रूप से यह माना जाएगा कि सरकार जिले के किसानों की आय में वृद्घि करने के लिए कृत संकल्पित नजर आ रही है और हो भी क्यों ना। बेमेतरा जिले की अगर बात की जाए तो बेमेतरा जिले की पहचान एक कृषि प्रधान जिले के रूप में अब तक होती रही है तथा स्थानीय स्तर पर किसानों के पास कृषि के उपज के अलावा और कोई भी आय के साधन नहीं हैं। एथेनाल बनाने वाला कदम निश्चित रूप से जिले के किसानों के लिए एक तरह से वरदान साबित होगा और जिले के किसान पहले से कहीं ज्यादा मेहनत और लगन से बेहतर उत्पादन कर एथेनाल की योजना में अपनी अहम भूमिका निभाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।

समिति गठन के जाने के काम में आई तेजी

राज्य सरकार के दिए गए प्रस्ताव के बाद केंद्र सरकार द्वारा उक्त प्रस्ताव पर लगाई गई मुहर के बाद अब यह तो स्पष्ट हो चुका है कि प्रदेश में एथेनाल बनाए जाने की फैक्ट्री लगाई जाएगी, जिसे ध्यान में रखकर, क्योंकि आज से 12 साल पहले इसकी कल्पना बेमेतरा जिले से ही की गई थी जिसके चलते जिलेवासी चाहते हैं इसके उत्पादन की शुरुआत बेमेतरा जिले से हो तथा उत्पादन के लिए बकायदा फैक्ट्री लगाने के लिए एक समिति गठित किए जाने के काम में तेजी भी आई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही एक समिति गठित कर राज्य शासन के समक्ष जिले में फैक्ट्री लगाने के लिए अपना दावा भी प्रस्तुत कर देगी। उक्त दावे को मजबूती प्रदान करने के लिए बेमेतरा विधायक आशीष छाबड़ा की अहम भूमिका भी होगी, वे भी चाहेंगे किए एथेनाल की फैक्ट्री बेमेतरा जिले में स्थापित हो।

एथेनाल कारखाने पर लोगों की उम्मीद टिकी

15 साल भारतीय जनता पार्टी के शासन के दरमियान पड़ोसी जिले में तो शक्कर कारखाना स्थापित कर दिया गया, जबकि बेमेतरा जिले में सर्वाधिक गुणवत्ता युक्त गन्ने के उत्पादन की बात कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं, उसके बाद भी यहां एक भी शक्कर कारखाने की स्थापना नहीं हो पाना निश्चित रूप से राजनीतिक साजिश का शिकार होने वाली बात ही कही जा सकती, किंतु जिले वासी उक्त बातों को भूलकर अब उम्मीद लगा बैठे हैं कि बेमेतरा जिले में एथेनाल का कारखाना स्थापित हो पाता है तो निश्चित रूप से जिले के लिए न केवल उपलब्धि होगी, बल्कि किसानों के लिए सरकार की एक बड़ी सौगात भी कही जा सकती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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