कवर्धा (नईदुनिया न्यूज)। पर्यावरण को संतुलित और लोगों को पर्यावरण परिवेश देने के लिए वन विभाग ने सरोधा मार्ग में वर्ष 2011-12 में वन विभाग द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत 25 लाख 75 हजार रुपये की लागत से आक्सीजन जोन सरोदा को विकसित किया गया। जिले केएक मात्र आक्सीजन जोन को ही आक्सीजन की जरूरत पड़ गई है। जो आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। 10 वर्ष पूर्व 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आक्सीजन जोन का निर्माण किया। लेकिन देखरेख के अभाव में यह जोन कबाड़ होने लगा हैं, पेड़ पौधे सूखने लगे है। साथ ही लोगों को आकर्षित भी नहीं कर पा रही है।

तालाबों में पानी नहीं भरा जा सका है

स्वीकृत राशि का उपयोग केवल सड़क बिछाने में कर दिया गया। वह सड़क भी उखड़ने लगा है। आक्सीजन जोन को पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाया गया। लोगों को पेड़ पौधों के साथ-साथ पक्षियां दिखाई दे और उनकी चहचाहट सुनाई दे। इसके लिए आक्सीजन जोन में गड्ढानुमा छोटे तालाब बनाए गए है। और इसके लिए बोर भी खनन किया गया आज तक इन तालाबों में पानी नहीं भरा जा सका है। बरसात के पानी से यह गड्ढे भर जाते है।

पेड़ पौधे सूखने लगेः सरोधा मार्ग पर वर्ष 2011-12 के निर्माण वर्ष में ही आक्सीजन जोन परिसर में वृहद स्तर पर पौधरोपण भी किया। इसमें 220 पीपल, 220 बरगद सहित कई पौधे रोपित किए गए। आज की स्थिति में यहां पर गिनती के ही रोपित पौधे है। अन्य रोपित पौधे भी दिखाई देते है। लेकिन सूखे हालत में जबकि प्राकृतिक रूप से झाड़ियां और पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद है।

इस मार्ग से सैकड़ों की संख्या में लोग गुजरते है

सरोधा बांध देखने व घूमने जाने के लिए आए दिन इस मार्ग से सैकड़ों की संख्या में लोग गुजरते है। इसी मार्ग पर आक्सीजन जोन बनाया गया है लेकिन यहां के गेट में हमेशा ही ताला लटका रहता है। जिसके चलते लोग अंदर जा नहीं पाते । लोगों का कहना है कि लाखों रुपए खर्च कर जब इस जोन को बनाया गया हैं तो उसकी सुंदरता बनाए रखने की जिम्मेदारी विभाग की होती है। लेकिन विभाग द्वारा इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं और आक्सीजन जोन पूरी तरह दम तोड़ रही है। यहां के गेट को खोलने व बंद करने के लिए एक कर्मचारी नियुक्त करें। ताकि यहां से गुजरने वाले लोग इस जोन को देख व जान सके।

आक्सीजन जोन के भीतर महिला की हुई थी हत्या

आक्सीजन जोन में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहा है। ये लोग यहां शराब पीते हैं और खाली बोतल व डिस्पोजल छोड़कर चले जाते हैं। ग्रामीण इससे भी नाराज हैं। यहां एक बार हत्या का मामला सामने आ चुका है। 12 जुलाई 2019 को यहां अज्ञात महिला का शव मिला था। शव को किसी भारी वस्तु से कुचल दिया था, जिससे महिला की पहचान नहीं हो रही थी। अज्ञात महिला की पहचान के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। हालांकि इस मामले को लेकर पुलिस ने उसी दौर पर खुलाशा कर दिया था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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