देवकर। नईदुनिया न्यूज

नगर देवकर के 11 ग्रामों के धान खरीदी सेवा सहकारी केंद्र और नगर क्षेत्र समीप मौहभाठा (मोहगांव) स्थित सेवा सहकारी समिति मोहगांव के धान खरीदी केंद्र में नियमित रूप से परिवहन नहीं होने के कारण निजी परिवहन की दरकार होने लगी है। क्योंकि धान खरीदी के पश्चात उठाव नहीं होने से धान-बारदानों का केंद्रों में अंबार लग गया है। विगत माह हुई बारिश से भीग जाने के कारण बारदाना सड़ चुका है। चूंकि समिति प्रबंधकों द्वारा बारदाना बदलने व प्रशासन द्वारा समय रहते उठाव नही होने से बारदाना फट जाने के कारण समिति केंद्रों में धान की खुले आम बर्बादी होते देखी जा रही है। अव्यवस्थता का आलम तो यह है कि खरीदी केंद्रों में बम्पर धान का स्टॉक आ चुका है। परंतु समस्या इसलिए गंभीर है कि इस बम्पर धान के स्टॉक को परिवहन नही करवा रहे है,जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है।अगर ़जिला प्रशासन तत्काल प्रभाव में आकर ध्यान दे तो किसानों को केंद्रों में हो रही असुविधा से जल्द निजाद मिल सकती है।मगर समितियों द्वारा स्टॉक में परिवहन न हो पाने से कई हफ़्‌तों से जाम धान भरे फ़टे बारदानों को फिलहाल पॉलिथीन व कागजों के गुच्छे डालकर अपनी नाकामियों को छिपाने का सार्थक प्रयास समिति द्वारा हो रही है।

चूंकि हर समिति केंद्रों में अभी लक्ष्य से काफी पीछे है।वही धान का आवक अभी भी जारी है जिसे देखते हुए आगामी 30 जनवरी तक अपने खरीदी लक्ष्य सीमा को पार कर जाए ऐसी उम्मीद लगायी जा रही है। ज्ञात हो कि 10 गाँवों के अधीनस्थ खरीदी केंद्र मोहगांव में जहां 60,000 क्विंटल और वही नगर देवकर के समिति केंद्र में 1 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। वही अब तक मोहगांव केंद्र में 55 हजार क्विंटल तो देवकर के खरीदी केंद्र में 78700 क्विंटल में धान की ख़रीदी अब तक हो चुकी है। दोनों केन्द्रों में बम्पर स्टाक खरीदी हो जाने के पश्चात परिवहन नही हो पाने के कारण जाम हो जाने के कारण तौल कार्य प्रभावित हो रहा है और धान भंडारण के लिए अब नगर अधीनस्थ समितियों में जगह ही नही बची है। इससे किसानों को व्यापक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ़जिला प्रशासन को तत्काल धान का परिवहन कर भण्डारण केंद्र तक भिजवाने हेतु कदम उठवाने चाहिए वरना यह धान आगामी के महीनों तक का समय लग जाएगा। साथ ही इसी तरह का समस्याओं क्षेत्र में निकटस्थ स्थित परसबोड, चोंगी-खपरी, और मोहभट्टा में खरीदी समिति लगातार इसी तरह के समस्याओं से जूझ रहा है।

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