किशोर तिवारी(बेमेतरा नईदुनिया न्यूज)। कृषि प्रधान जिला बेमेतरा में किसानों के हितों को ध्यान में रखकर 91 खरीदी केंद्रों पर धान की खरीदी होती थी उसे बढ़ाकर अब 111 खरीदी केंद्र बना दिए गए हैं, वहीं 54 सेवा सहकारी समिति के बदले अब 102 सेवा सहकारी समिति अस्तित्व में आ गए हैं। हालांकि इस वित्तीय वर्ष में समितियों में लेन-देन 54 समितियों में ही होगी किंतु नए वित्तीय वर्ष में पूरे 102 सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों के लेनदेन तथा रिकार्ड रखे जाएंगे। खरीदी केंद्रों में बढ़ोतरी किसानों के हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है,ताकि किसानों का काम जल्द हो सके और उन्हें भीड़-भाड़ का सामना करना ना पड़े।

जनप्रतिनिधि खरीदी केंद्र व नए सेवा सहकारी समितियों के उद्घाटन में व्यस्त

हालांकि धान खरीदी को महज एक सप्ताह का ही समय शेष रह गया है, जिसके चलते बैंक द्वारा नए स्वीकृत खरीदी केंद्र तथा अस्तित्व में आ रहे नई सेवा सहकारी समितियों की सूची जारी कर दी गई है, जिसके चलते इन दिनों जनप्रतिनिधियों को नए खरीदी केंद्र तथा नए सेवा सहकारी समितियों के उद्घाटन में व्यस्त देखा जा रहा है, जिसके चलते लगभग जिले के सभी खरीदी केंद्रों व नए सेवा सहकारी समितियों काउद्घाटन लगभग पूरा हो चुका है, वहीं बचे हुए कुछ खरीदी केंद्रों का उद्घाटन भी जल्द ही जनप्रतिनिधियों द्वारा कर दिया जाएगा।

किसानों में भी देखी जा रही है खुशी

जिले में नए 20 धान खरीदी केंद्र के स्वीकृति होने के बाद यह निर्णय किसानों के हित में भी कहा जा सकता है तथा उक्त निर्णय से न केवल राहत ही मिलेगी बल्कि किसानों में खुशी हुई देखी जा रही है। उन्हें इस बात की खुशी है कि अब उन्हें धान बेचने के लिए ज्यादा समय इंतजार करना नहीं पड़ेगा। साथ ही ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ेगी। कम समय में तथा अपने गांव के पास में ही धान बेचने में किसानों को सहूलियत होगी

54 सेवा सहकारी समितियों में से13 समितियों के अध्यक्ष पर गिरी गाज, पद से हुए बेदखल

जिले के 54 सेवा सहकारी समितियों को बढ़ाकर 102 सेवा सहकारी समितियां कर दी गई है, किंतु इसका खामियाजा उन निर्वाचित समिति के अध्यक्ष को उठाना पड़ा है जो कि नई समिति के क्षेत्र में आने के चलते उन्हें पद से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि जिले में 13 अध्यक्ष ऐसे हैं, जो कि इस क्राइटेरिया में आने की वजह से पद मुक्त कर दिए गए तथा इसकी वजह समिति में बहुमत नहीं होने की बात कही गई है।

एक तरह से घाटे का सौदा भी हो सकता है

जिले में 54 सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक किसानों के लेन-देन सहित तमाम औपचारिकताएं पूरी की जाती रही है। इसके बाद भी समितियों के नुकसान में होने की बात कही जाती रही है, किंतु अचानक समितियों की संख्या में इजाफा कर दिए जाने के बाद इस बात की चर्चा सामान्य होकर रह गई है कि समितियों की संख्या में इजाफा कर देने के बाद संभावित रूप से समितियों के स्थापना व्यय तथा कर्मचारियों की संख्या में इजाफा होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किंतु इन समितियों में उन्हीं किसानों के काम निपटाए जाएंगे जो पूर्व में 54 समितियों में पंजीकृत थे, जिस अनुपात में समितियों की संख्या में इजाफा हुआ है उस अनुपात में न तो किसानों की संख्या में इजाफा होगा और ना ही बैंक समिति के लेनदेन के आय में वृद्घि होगी, जब पूर्व में ही समिति नुकसान में चल रही थी तो ऐसी स्थिति में नए स्थापना व्यय बढ़ जाने की वजह से समितियों के घाटे और भी बढ़ सकते हैं और ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में समितियों के भविष्य पर भी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लग सकता है।

जांच करने पर चौंकाने वाले तथ्य आ सकते हैं सामने

जिले में संचालित 54 सेवा सहकारी समितियों की अगर बात की जाए तो इनमें 44 समितियों में ही पूर्णकालिक समिति प्रबंधक कार्यरत थे तथा 10 समितियों में अभी भी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत या सहायक समिति प्रबंधक या समिति के कर्मचारी संचालन कर रहे थे। इन 10 जगहों पर कहीं बारीकी से जांच की जाए तो ना केवल कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं, बल्कि इन समिति के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि समिति के कर्मचारियों द्वारा समिति के निर्वाचित जनप्रतिनिधि के प्रभाव में आकर कुछ ऐसे निर्णय भी तथा ऐसे अनावश्यक खर्च भी रिकार्ड में दर्शाया गया है जो कि समिति के हित को अनदेखी करने वाली बात ही कही जा सकती है। बस आवश्यकता है यहां बारीकी से जांच करने की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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