थानखम्हरिया(नईदुनिया न्यूज)। शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने समूचे तहसील क्षेत्र में होड़ सी लगी हुयी है। इस अवैध धंधे में लिप्त लोग शासकीय भूमि में कब्जा कर उसे बेच रहे हैं। यह सब प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र में शासकीय जमीन की खरीदी बिक्री का कार्य बेधड़क बे रोकटोक चल रहा है। राजस्व विभाग की उदासीनता के चलते अवैध कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद है। इसका ताजा उदाहरण समीपस्थ ग्राम भुसंडी है, जहां निस्तारी तालाब को एक ग्रामीण कब्जा करने उतारू है।

ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत निस्तारी संकट दूर करने तालाब का निर्माण किया गया है, जिस पर गांव के ही सुखचंद नामक व्यक्ति अवैध कब्जा कर ग्रामीणों को परेशान कर रहा है। सरपंच पुष्पा बाई ने कलेक्टर, तहसीलदार तथा थाना प्रभारी को आवेदन देकर कब्जा हटाने की गुहार लगाई है। दो अगस्त को सुखचंद तालाब का पार फोड़कर पानी निकालने लगा, तब ग्रामीणों ने तत्काल थाना थानखम्हरिया को इसकी सूचना दी, जिस पर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने भुसंडी पहुंचकर हस्तक्षेप किया और तालाब को फोड़ने से रोका। जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत सौंरी के आश्रित ग्राम भुसंडी में मनरेगा के तहत तालाब निर्माण किया गया है, जिस पर गांव के ही सुखचंद हमेशा कब्जा जमाने ग्रामीणों पर धौंस जमाता रहता है। यहां तक कि उस तालाब में फसल भी लगा देता है। उक्त तालाब राजस्व रिकार्ड में तालाब दर्ज नहीं है, जिसे दर्ज कराने सरपंच द्वारा तहसीलदार को आवेदन दिया गया है, परंतु इसे अब तक दर्ज नहीं किया गया है। उक्त मामला वर्तमान में तहसील न्यायालय में लंबित है। राजस्व विभाग की उदासीनता के चलते अवैध कब्जा करने वाले का हौसले बुलंद है, जिससे विवाद की स्थिति निर्मित होती रहती है। भुसंडी में शासकीय भूमि को मुक्त कराने की मांग सरपंच पुष्पा बाई, ग्रामीणों रोहित, अशोक वर्मा, बद्रीलाल, चरणदास, मनोज कुमार, महादेव, जयकिशन, गंगाधर यादव, रामायण, सागर पटेल, हरिशचंद्र, झग्गर सिंह, मिथिलेश पटेल, जीवन वर्मा, देवराम पटेल, खेमसिंह मंडावी, रोशन, हरिसिंह, धर्मिन आदि ने की है।

शासकीय जमीन बेचने पर तीन से सात साल की सजा

किसी भी किस्म की शासकीय भूमि को फर्जी तरीके से खरीदी-बिक्री करने पर भूराजस्व अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत तीन साल या उससे अधिक की सजा और जुर्माना का प्रावधान है, फिर भी लोग केवल सौ रुपये के स्टाम्प पेपर में शासकीय जमीन की बेधड़क खरीदी-बिक्री कर रहे हैं।

विकास योजनाओं के लिए नहीं बची शासकीय भूमि

नगर पंचायत हो या ग्राम पंचायत क्षेत्र शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे के चलते सामुदायिक भवन निर्माण, आंगनबाड़ी भवन, सामाजिक भवन, ग्राम पंचायत भवन, रोका-छेका के तहत कांजी हाऊस, गौठान निर्माण एवं अन्य विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए शासकीय भूमि का टोटा पड़ गया है। एक-एक फुट जमीन के लिये मारामारी हो रही है। जमीन के अभाव में अनेक शासकीय योजनायें फाइलों में ही सिमटी हुई हैं। अनेक विकास कार्यों की राशि लेप्स हो रही है। स्थानीय नगर पंचायत में ही विकास कार्य हेतु उपलब्ध कराई गई राशि शासकीय भूमि नहीं होने के कारण निर्माण कार्य रुके हुए हैं। नगर में अनेक बेशकीमती भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है, परंतु जिम्मेदार लोगों में इसे हटाने का माद्दा ही नहीं है।

तहसील से लेकर कमिश्नरी तक नहीं हो रहा प्रकरणों का निपटारा

थानखम्हरिया तहसील क्षेत्र, नगर पंचायत क्षेत्र तथा ग्राम पंचायतों के राजस्व प्रकरणों के निपटारे में लेट लतीपी के चलते यहां के जनप्रतिनिधि खासे परेशान हैं। साथ ही निजी जमीन विवाद के निपटारे में तहसील न्यायालय थानखम्हरिया से लेकर कमिश्नरी दुर्ग तक फिसड्डी साबित हो रहे हैं। 15 दिन की मियाद की जगह छह से 12 माह तक का समय लग रहा है। रिकार्ड का निरीक्षण किया जाए तो संभवतः 10 प्रतिशत ही फैसले लिए गए होंगे। शेष 90 प्रतिशत मामले लंबित हैं, जिससे अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हैं। भूमि नामांतरण, बंटवारा, त्रुटि सुधार, बेदखली तथा रकबा व खसरा नं सुधार कार्य में नीचे से लेकर ऊपर तक रिश्वतखोरी का धंधा चल रहा है। यही कारण है कि मामले को लंबा खींचा जाता है। शासन की लोक सेवा गारंटी अधिनियम का कहीं पालन नहीं किया जा रहा है। जनकल्याण के लिए शासन नए नियम बनाकर श्रेय तो ले लेता है, परंतु इसका पालन नहीं किया जा रहा है और न ही इसकी मानिंटरिंग होती।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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